पंच केदारों में द्वितीय केदार के रूप में विख्यात भगवान श्री मद्महेश्वर मंदिर के कपाट रविवार को श्रद्धा, आस्था और सनातन परंपराओं के साथ विधि-विधानपूर्वक श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। कपाटोद्घाटन के अवसर पर पूरा धाम हर-हर महादेव और भगवान मद्महेश्वर के जयकारों से भक्तिमय माहौल में गूंज उठा।
भगवान मद्महेश्वर की उत्सव डोली प्रातः गौण्डार गांव से पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों और भक्ति भाव के साथ धाम के लिए रवाना हुई। लगभग सुबह 10:45 बजे उत्सव डोली मद्महेश्वर धाम पहुंची, जहां मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चारण, विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच कपाट खोलने की प्रक्रिया शुरू की गई।
मुख्य पुजारी शिव शंकर लिंग और वेदपाठियों ने पूजा-अर्चना संपन्न कराने के बाद करीब 11 बजे मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इस दौरान लगभग 1135 श्रद्धालुओं ने भगवान मद्महेश्वर के प्रथम दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया तथा देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति एवं कल्याण की कामना की।
यात्रा व्यवस्थाओं के किए गए विशेष इंतजाम
कपाटोद्घाटन के अवसर पर मंदिर समिति और प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुरक्षा, आवागमन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के व्यापक इंतजाम किए गए थे। यात्रा मार्ग पर भी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गईं।
हिमालय की गोद में बसे धाम की अद्भुत छटा
हिमालय की गोद में स्थित श्री मद्महेश्वर धाम अपनी दिव्यता, आध्यात्मिक आभा और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए विशेष पहचान रखता है। कपाट खुलने के साथ ही अब देश-विदेश से श्रद्धालुओं के यहां पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है।
