मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड सरकार ‘विकास भी और विरासत भी’ के मंत्र के साथ देवभूमि को आगे बढ़ा रही है। कुमाऊं में मानसखंड मंदिर माला मिशन के तहत धार्मिक स्थलों का विकास किया जा रहा है, जिससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
नैनीताल में आयोजित मां नंदा-सुनंदा महोत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री ने मां नंदा-सुनंदा के श्रीचरणों में नमन कर प्रदेशवासियों की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि नंदा देवी महोत्सव केवल मेला नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं का उत्सव है। लोकगीत, झोड़ा-चांचरी और ढोल-दमाऊं जैसी परंपराएं इसके माध्यम से जीवंत होती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केदारखंड की तर्ज पर कुमाऊं में मानसखंड मंदिर माला मिशन के तहत मां नैना देवी, कैंची धाम और मुक्तेश्वर सहित प्रमुख धार्मिक स्थलों का विकास किया जा रहा है। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं देने के साथ प्राचीन विरासत का संरक्षण करना है।
उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्यटन बढ़ने से स्थानीय युवाओं को रोजगार और मातृशक्ति को स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे। स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय उत्पाद तैयार करने वाली महिलाओं को बाजार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। महिला स्वयं सहायता समूहों को पांच लाख रुपये तक ब्याजमुक्त ऋण की व्यवस्था भी की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अब तक 35 हजार युवाओं को सरकारी सेवाओं में रोजगार मिला है। सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता के लिए नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य की संस्कृति, पहचान और संसाधनों के संरक्षण के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। महिलाओं के अधिकारों के लिए उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू की गई है।
महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री ने मां नंदा-सुनंदा की आरती में भी भाग लिया। इस दौरान कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, विधायक सरिता आर्या समेत जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।
