उत्तराखंड कांग्रेस ने एसआईआर के दौरान 97,186 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए स्वतः जनरेट किए गए प्रपत्र-7 की वैधानिकता पर सवाल उठाते हुए पूरी प्रक्रिया की तत्काल समीक्षा की मांग की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र भेजकर कहा कि जिन मतदाताओं के नाम पहले से मतदाता सूची में थे, उन्हें दोबारा नाम जुड़वाने के लिए नए मतदाता की तरह प्रपत्र-6 भरने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए।

गोदियाल ने पत्र में कहा कि जनवरी से 29 मई 2026 के बीच हुई प्री-एसआईआर प्रक्रिया में डुप्लीकेशन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक प्रक्रियाओं के आधार पर 4,53,459 मतदाताओं के नाम हटाए गए। इसके बाद 14 जुलाई को प्रकाशित प्रारूप मतदाता सूची में करीब 71.33 लाख मतदाता थे, जबकि 24,30,387 लोगों को विसंगति या तार्किक असंगति की श्रेणी में रखा गया।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के अनुसार, दस्तावेज जमा नहीं होने के आधार पर 97,186 मतदाताओं के संबंध में प्रपत्र-7 स्वतः जनरेट किए गए। इनमें आपत्तिकर्ता के तौर पर सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी अथवा निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी का उल्लेख किया गया। गोदियाल ने इसी व्यवस्था को नियमों के विपरीत बताते हुए सवाल उठाया है।

उन्होंने कहा कि निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 के नियम 13(2) के तहत किसी नाम को हटाने के लिए प्रपत्र-7 में आपत्ति निर्धारित व्यक्ति द्वारा की जानी चाहिए। ऐसे में केवल दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने के आधार पर निर्वाचन अधिकारी स्वयं आपत्तिकर्ता बनकर प्रपत्र-7 तैयार या प्रस्तुत नहीं कर सकते। कांग्रेस ने कहा कि यदि ऐसा हुआ है तो उसके आधार पर हटाए गए नामों की प्रक्रिया की दोबारा जांच जरूरी है।

गोदियाल ने यह भी कहा कि पहले से मतदाता सूची में शामिल रहे लोगों से प्रपत्र-6 में पहली बार नाम जुड़वाने संबंधी घोषणा लेना उचित नहीं है। उन्होंने निर्वाचन आयोग से मांग की कि ऐसे मतदाताओं के पुराने निर्वाचन अभिलेखों के आधार पर नाम दोबारा जोड़ने के लिए अलग और सरल व्यवस्था बनाई जाए।

उन्होंने आयोग से प्रपत्र-7 तैयार करने की वैधानिक अनुमति का आधार सार्वजनिक करने, 97,186 मामलों समेत ऐसे सभी नाम विलोपनों की पुनः जांच करने और यदि नाम नियमविरुद्ध प्रक्रिया से हटाए गए हैं तो उन्हें मतदाता सूची में पुनः शामिल करने की मांग की है।