फार्मेसी पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने वाले छात्रों को अब प्रवेश से पहले अपनी शैक्षणिक पात्रता की जांच करानी होगी। उत्तराखंड फार्मेसी काउंसिल ने राज्य के सभी फार्मेसी शिक्षण संस्थानों को वर्ष 2026 में प्रवेश लेने वाले अभ्यर्थियों की इंटरमीडिएट अंकतालिका अच्छी तरह जांचने के निर्देश दिए हैं। निर्धारित शैक्षणिक योग्यता पूरी नहीं करने वाले छात्रों को प्रवेश दिए जाने पर बाद में फार्मेसी काउंसिल में उनका पंजीकरण नहीं हो सकेगा।

राज्य में वर्तमान में 96 कॉलेज, 24 विश्वविद्यालय और 21 पॉलीटेक्निक में फार्मेसी के पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं। इनमें दो वर्षीय डीफार्मा डिप्लोमा, चार वर्षीय बीफार्मा डिग्री, छह वर्षीय फार्म-डी और दो वर्षीय एमफार्म पाठ्यक्रम शामिल हैं। पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद अभ्यर्थी फार्मेसी काउंसिल में पंजीकरण के लिए आवेदन करते हैं।

फार्मेसी एक्ट-1948 के तहत बने एजुकेशन रेगुलेशन-2020 के अनुसार फार्मेसी पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए साइंस स्ट्रीम से इंटरमीडिएट उत्तीर्ण होना जरूरी है। इसमें भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और गणित या जीव विज्ञान विषय निर्धारित हैं। बीफार्मा के लिए अंग्रेजी विषय भी अनिवार्य है।

प्रवेश के बाद सामने आ रही समस्या

काउंसिल के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें संस्थानों ने अनिवार्य विज्ञान विषयों में से किसी एक में अनुत्तीर्ण अभ्यर्थियों को भी फार्मेसी पाठ्यक्रम में प्रवेश दे दिया। दो या चार वर्ष का पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद जब ऐसे अभ्यर्थी पंजीकरण के लिए काउंसिल पहुंचे तो उनकी शैक्षणिक पात्रता पूरी नहीं मिली। इसके चलते उनका फार्मासिस्ट के रूप में पंजीकरण नहीं हो सका।

इससे अभ्यर्थियों का समय और पैसा दोनों बर्बाद होने के साथ विवाद की स्थिति भी बन रही है। कुछ अभ्यर्थियों ने इस मामले में उच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया है।

काउंसिल ने पूर्व में भी सभी संबंधित संस्थानों को प्रवेश के समय इंटरमीडिएट की अंकतालिका और विषयों की पात्रता जांचने के निर्देश दिए थे। अब वर्ष 2026 के प्रवेश को देखते हुए संस्थानों को दोबारा आगाह किया गया है कि पात्रता की पूरी जांच के बाद ही अभ्यर्थियों को फार्मेसी पाठ्यक्रम में प्रवेश दें, ताकि बाद में पंजीकरण के समय विवाद की स्थिति न बने।