Uttarakhand: उद्योगों में श्रमिकों का हो रहा उत्पीड़न, सरकार कार्रवाई करे : हरक सिंह रावत

प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजपुर रोड में आयोजित पत्रकार वार्ता में कांग्रेस चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत ने प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों के उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए सरकार और उद्योग प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए।

डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि सेलाकुई, हरिद्वार और उधम सिंह नगर के सिडकुल क्षेत्रों में उद्योग प्रबंधन लगातार श्रमिकों के मौलिक एवं श्रम अधिकारों की अनदेखी कर रहा है। उन्होंने कहा कि श्रमिक कई बार अपनी मांगों को लेकर सरकार और उद्योग प्रबंधन से वार्ता कर चुके हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया। इसके चलते अब श्रमिक आंदोलन के लिए मजबूर हो रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार श्रमिकों की समस्याओं को हल करने के बजाय पुलिस बल का इस्तेमाल कर उनकी आवाज दबाने का काम कर रही है। बेगुनाह श्रमिकों पर लाठीचार्ज लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और यह सरकार के तानाशाही रवैये को दर्शाता है।

डॉ. रावत ने कहा कि उद्योगों में महिला श्रमिकों के साथ भी भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई फैक्ट्रियों में महिलाओं के लिए शौचालय तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है और वेतन में भी भेदभाव किया जाता है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति सरकार के महिला सशक्तिकरण के दावों की पोल खोलती है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि श्रमिकों से आठ घंटे से अधिक काम लिया जा रहा है, लेकिन उन्हें उचित भुगतान नहीं मिल रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि न्यूनतम वेतन अधिनियम का पालन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि अकुशल कर्मचारियों को कम से कम 20 हजार रुपये, अर्धकुशल कर्मचारियों को 23 हजार रुपये, कुशल कर्मचारियों को 25 हजार रुपये और अति कुशल कर्मचारियों को 30 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि श्रमिकों को बिना कारण बताए नौकरी से निकालने, मानसिक उत्पीड़न करने और ठेका श्रमिकों के साथ अमानवीय व्यवहार की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। कई उद्योगों में नियुक्ति पत्र, वेतन पर्ची और उपस्थिति रजिस्टर तक उपलब्ध नहीं कराए जा रहे, जो श्रम कानूनों का खुला उल्लंघन है।

डॉ. हरक सिंह रावत ने श्रम विभाग से मांग की कि तत्काल उच्च स्तरीय समिति बनाकर फैक्ट्रियों का विशेष निरीक्षण कराया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि श्रमिकों का किसी भी स्तर पर उत्पीड़न न हो। उन्होंने कहा कि श्रम संगठनों की मौजूदगी में शिविर लगाकर श्रमिकों की समस्याएं सुनी जाएं और उनका समाधान किया जाए।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उद्योगों में श्रमिकों का उत्पीड़न बंद नहीं हुआ तो कांग्रेस के श्रम संगठन इंटक और कांग्रेस पार्टी आंदोलन के लिए बाध्य होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

पत्रकार वार्ता में शीशपाल सिंह बिष्ट, लालचंद शर्मा और राकेश कुमार राजपूत सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

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