राज्य में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड के खतरे से निपटने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। नेशनल ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड रिस्क मिटिगेशन प्रोग्राम के तहत 13 संवेदनशील हिमनद झीलों की निगरानी, जोखिम आकलन और न्यूनीकरण के लिए एक विशेष वर्किंग ग्रुप का गठन किया गया है।
इस वर्किंग ग्रुप का नोडल संस्थान वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी को बनाया गया है। इसके अलावा समूह में सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट, उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी, उत्तराखण्ड अंतरिक्ष उपयोग केन्द्र, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग, नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर और जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के विशेषज्ञ और वरिष्ठ भू-वैज्ञानिक शामिल किए गए हैं।
वर्किंग ग्रुप के माध्यम से आधुनिक निगरानी प्रणाली विकसित की जाएगी। साथ ही प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली की स्थापना, वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी अध्ययन और जोखिम न्यूनीकरण उपायों का समन्वित क्रियान्वयन किया जाएगा।
परियोजना के प्रभावी संचालन के लिए मुख्यमंत्री द्वारा कुल 9 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। इसमें से 7.80 करोड़ रुपये वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी को उपकरणों की खरीद, सैटेलाइट इमेजरी, सॉफ्टवेयर, फील्ड ऑपरेशन और मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण के लिए दिए जाएंगे। जबकि 1.20 करोड़ रुपये फील्ड सर्वेक्षण, जन-जागरूकता और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के लिए उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के माध्यम से जारी किए जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि यह परियोजना राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सहयोग से संचालित की जा रही है, जिसका उद्देश्य हिमनद झीलों से उत्पन्न संभावित आपदाओं के जोखिम को कम करना और समयबद्ध चेतावनी तंत्र विकसित करना है।
