हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद प्रकरण में राज्य सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। विजिलेंस की विस्तृत जांच में आपराधिक षड्यंत्र और धोखाधड़ी के जरिए भूमि क्रय-विक्रय कर नगर निगम को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर मामले में संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और भूमि विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।
मुख्यमंत्री धामी ने अभियोग दर्ज करने को दी स्वीकृति
मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य सतर्कता समिति की संस्तुति पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले में संलिप्त अधिकारियों, कर्मचारियों और भूमि विक्रेताओं के विरुद्ध अभियोग दर्ज किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। जांच में दोषी पाए गए व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी।
तत्कालीन नगर आयुक्त समेत कई अधिकारियों पर गिरेगी गाज
मामले में जिन अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ अभियोग दर्ज करने की संस्तुति की गई है, उनमें तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी, तत्कालीन सहायक नगर आयुक्त रविन्द्र कुमार दयाल, तत्कालीन कर अधीक्षक लक्ष्मीकान्त भट्ट, तत्कालीन सहायक अभियंता एवं प्रभारी अधिशासी अभियंता आनन्द सिंह मिश्राण, तत्कालीन संपत्ति लिपिक वेदपाल तथा तत्कालीन मानचित्रकार दिनेश काण्डपाल शामिल हैं।
भूमि विक्रेताओं और अन्य संबंधित व्यक्तियों पर भी होगी कार्रवाई
विजिलेंस जांच में भूमि विक्रेताओं और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका भी सामने आई है। इसके आधार पर सुमन देवी, जितेंद्र कुमार, अभिषेक यादव और सुजीत कुमार सिंह के खिलाफ भी अभियोग दर्ज किए जाने की संस्तुति की गई है।
भ्रष्टाचार के मामलों में नहीं होगी कोई रियायत
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार की प्राथमिकता पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन सुनिश्चित करना है। शासन ने दोहराया है कि दोषियों के खिलाफ कठोरतम वैधानिक कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
