डोईवाला क्षेत्र में तैनात उप शिक्षा अधिकारी और उनकी महिला सहयोगी को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए विजिलेंस की टीम ने रंगे हाथ गिरफ्तार किए है।
जानकारी के अनुसार उप शिक्षा अधिकारी ने आशुतोष नगर ऋषिकेश स्थित एक स्कूल के मालिक से शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत छात्रों की फीस प्रतिपूर्ति से जुड़े बिल पास कराने के एवज में एक लाख रुपये की मांग की थी। स्कूल संचालकों ने बताया कि यह विद्यालय एक साल पहले बंद हो चुका है, इससे संबंधित दस्तावेज शिक्षा विभाग के कार्यालय में जमा करा दिए गए थे।
इस कार्रवाई को केवल एक मामले तक सीमित न मानते हुए पूरे प्रशासनिक तंत्र को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। आरटीई प्रतिपूर्ति जैसे संवेदनशील मामले में रिश्वत की मांग न सिर्फ कानून का उल्लंघन है, बल्कि गरीब और वंचित बच्चों के अधिकारों के साथ भी अन्याय है।
प्रदेश में सतर्कता विभाग और अन्य जांच एजेंसियां लगातार ट्रैप ऑपरेशन चला रही हैं और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की जा रही है। आरोपियों को रंगे हाथ पकड़कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है, जिससे सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूती मिल रही है।
मुख्यमंत्री पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि सरकार केवल नीतियां बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें प्रभावी रूप से लागू करना ही प्राथमिकता है। यही कारण है कि प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई अब तेज और परिणामकारी होती नजर आ रही है।
