कुंभ मेला-2027 में श्रद्धालुओं को सुगम और व्यवस्थित स्नान सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए हरिद्वार से बहादराबाद तक तीन किलोमीटर से अधिक लंबाई में नए घाटों का निर्माण कराया जा रहा है। गंग नहर बंदी की अवधि का उपयोग करते हुए निर्माण कार्यों को युद्धस्तर पर पूरा करने की तैयारी है। घाटों पर दिन-रात काम चल रहा है। मेलाधिकारी सोनिका और अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती ने बीती रात विभिन्न घाटों का निरीक्षण कर निर्माण कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता का जायजा लिया।

कुंभ मेले की तैयारियों के तहत सिंचाई विभाग के माध्यम से हरिद्वार से बहादराबाद के बीच नौ घाटों का निर्माण कराया जा रहा है। इनकी कुल लंबाई 2,966 मीटर है। मेला प्रशासन का जोर निर्धारित समयसीमा के भीतर निर्माण पूरा कराने के साथ गुणवत्ता बनाए रखने पर है। इसके लिए नियमित समीक्षा और स्थलीय निरीक्षण किए जा रहे हैं।

अपर गंग नहर के बाएं तट पर शहीद भगत सिंह घाट से सिंहद्वार के बीच 321 मीटर लंबे कामधेनु घाट का निर्माण किया जा रहा है। अमरापुर घाट से ऋषिकुल पुल, शंकराचार्य चौक और तुलसी घाट क्षेत्र में कुल 770 मीटर लंबाई में घाट विकसित किए जा रहे हैं। वहीं, ऋषिकुल पुल से साक्षी सतनाम घाट के बीच 735 मीटर लंबाई में निर्माण कार्य चल रहा है। इसमें जानकी घाट, लक्ष्मण घाट और भरत घाट के हिस्से शामिल हैं। अपर गंग नहर के दाएं तट पर नगर निगम कार्यालय के निकट 275 मीटर लंबा घाट भी बनाया जा रहा है।

इसके अलावा बैरागी कैंप क्षेत्र में स्केप चैनल पर 260 मीटर लंबे स्नान घाट और खड़खड़ी के निकट 75 मीटर लंबे वेदनिकेतन घाट का निर्माण किया जा रहा है। बहादराबाद में बैरियर संख्या छह के पास 200 मीटर लंबे छठ पूजा घाट का निर्माण प्रस्तावित कार्यों में शामिल है। ज्वालापुर में जटवाड़ा पुल के अपस्ट्रीम क्षेत्र में 300 मीटर लंबे घाट और दुर्गा मंदिर के निकट 30 मीटर लंबे घाट का भी निर्माण कराया जाना है।

हरकी पैड़ी क्षेत्र में पुनर्विकास योजना के तहत सीसीआर भवन के निकट से धनुष पुल के बीच 82 मीटर लंबे घाट का निर्माण भी जारी है। यह कार्य यूआईआईडीबी की योजना के अंतर्गत किया जा रहा है।

भीड़ प्रबंधन में मिलेगी मदद

कुंभ जैसे बड़े आयोजन में पर्याप्त स्नान घाटों की उपलब्धता श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़ प्रबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण है। नए घाट तैयार होने से स्नान के लिए उपलब्ध स्थान बढ़ेंगे और प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं का दबाव कम करने में मदद मिलेगी। इससे अलग-अलग क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित किया जा सकेगा।

निर्माण कार्यों को समय पर पूरा कराने के लिए श्रमिकों और मशीनों को बड़े पैमाने पर लगाया गया है। प्रत्येक घाट पर अभियंताओं की तैनाती कर कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता पर नजर रखी जा रही है। मेला प्रशासन का लक्ष्य कुंभ-2027 से पहले इन सुविधाओं को तैयार करना है, ताकि श्रद्धालुओं को स्नान के दौरान बेहतर व्यवस्थाएं मिल सकें।