23 साल पुराने जेनी प्रकरण में महिला के आरोपों के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत ने पत्रकार वार्ता कर आरोपों को खारिज करते हुए भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जेनी प्रकरण की सीबीआई और डीएनए जांच पहले ही हो चुकी है और न्यायालय का फैसला भी आ चुका है। अब इस मामले को फिर से उठाना अंकिता भंडारी प्रकरण से ध्यान भटकाने की कोशिश है। हरक ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट समेत कई लोगों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराने की बात कही।
कांग्रेस भवन में पत्रकारों से बातचीत में हरक सिंह रावत ने कहा कि जब इस मामले की जांच हुई थी, तब केंद्र में भाजपा की सरकार थी। सीबीआई जांच के बाद न्यायालय ने अपना निर्णय दिया था। ऐसे में अब इतने साल बाद मामले को दोबारा उठाने का औचित्य क्या है? यदि किसी को जांच या उसके निष्कर्षों पर आपत्ति थी तो उसे उसी समय सामने आना चाहिए था। उन्होंने कहा कि न्यायालय के फैसले के बाद इस तरह सवाल उठाना उचित नहीं है।
हरक ने आरोप लगाया कि भाजपा उनकी राजनीतिक और सामाजिक छवि खराब करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि इस मामले में उनकी छवि धूमिल करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और वह न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।
महिला ने दोबारा सीबीआई जांच की मांग
दरअसल, जेनी प्रकरण एक बार फिर तब चर्चा में आया, जब देहरादून पहुंची महिला ने पत्रकार वार्ता कर पूर्व में हुई घटनाओं को लेकर हरक सिंह रावत पर गंभीर आरोप लगाए। महिला ने वर्ष 2002 में देहरादून आने और उस समय अपनी उम्र 16 साल होने की बात कही। उसके अनुसार, वह यमुना कॉलोनी में करीब दो महीने रही थी। उसने आरोप लगाया कि उस दौरान हरक सिंह रावत ने उसके साथ दुष्कर्म किया। महिला का कहना था कि उस समय हरक सत्ता में थे और उनके प्रभाव के चलते उसे कहीं से मदद नहीं मिली।
महिला ने आरोप लगाया कि उसे मानसिक अस्पताल में रखा गया था। वह गर्भवती थी, लेकिन उसकी बात सुनने वाला कोई नहीं था। उसने दावा किया कि उसे धमकाकर वहां से बाहर निकाल दिया गया और कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी कराए गए। महिला ने कहा कि सीबीआई की टीम उससे मिलने केवल एक बार आई थी।
बेटे का डीएनए टेस्ट नहीं होने का दावा
महिला ने मामले की दोबारा सीबीआई जांच और डीएनए टेस्ट कराने की मांग उठाई। उसका सवाल था कि जब उसके बेटे का डीएनए टेस्ट ही नहीं हुआ तो जांच किस आधार पर पूरी हुई? उसने कहा कि उसके बेटे को अपने पिता का नाम जानने का अधिकार है। पत्रकार वार्ता के दौरान महिला कई बार भावुक भी हुई। उसने बताया कि मुख्यमंत्री की ओर से उसका नाम लिए जाने के बाद उसने देहरादून आने का फैसला किया।
2003 में गंवाना पड़ा था मंत्री पद
जेनी प्रकरण वर्ष 2003 में एनडी तिवारी सरकार के कार्यकाल में सामने आया था। उस समय जेनी नाम की महिला ने एक बच्चे को जन्म देने के बाद हरक सिंह रावत पर बच्चे का पिता होने का आरोप लगाया था। इस विवाद के चलते हरक सिंह रावत को मंत्री पद छोड़ना पड़ा था। मामले में डीएनए जांच भी कराई गई थी। अब महिला के दोबारा सामने आने और नए सिरे से जांच की मांग करने के बाद यह प्रकरण एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।

