संविधान हत्या दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि 25 जून 1975 को लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक काला अध्याय था। उन्होंने कहा कि तत्कालीन सरकार ने सत्ता बचाने के लिए नागरिक स्वतंत्रताओं का हनन किया, प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया और संविधान की मूल भावना को आघात पहुंचाया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र सेनानियों एवं उनके परिजनों को सम्मानित भी किया।
भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति लोकतांत्रिक अधिकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकार प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान इन मूल अधिकारों को कुचलने का प्रयास किया गया, लेकिन देश की जागरूक जनता ने लोकतांत्रिक तरीकों से इसका जवाब दिया और लोकतंत्र की पुनर्स्थापना सुनिश्चित की।
राज्य सरकार लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान के लिए कर रही कार्य
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान और कल्याण के लिए लगातार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2023 में लोकतंत्र सेनानियों की सम्मान निधि को 16 हजार रुपये से बढ़ाकर 20 हजार रुपये प्रतिमाह किया गया है।
आश्रित जीवनसाथियों को विशेष पहचान-पत्र जारी
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि आपातकाल के दौरान जेल गए लोकतंत्र सेनानियों तथा उनके आश्रित जीवनसाथियों को विशेष पहचान-पत्र जारी किए गए हैं, ताकि उनके योगदान को उचित सम्मान मिल सके।
कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी और खजान दास, विधायक सविता कपूर एवं उमेश शर्मा काऊ, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष शैलेन्द्र बिष्ट, प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार तथा महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
