मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समाज के लोगों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। टिहरी, देहरादून, उत्तरकाशी, चकराता और कालसी समेत विभिन्न दूरस्थ एवं पर्वतीय क्षेत्रों से पहुंचे लोगों ने विकास संबंधी आवश्यकताएं और स्थानीय समस्याएं मुख्यमंत्री के सामने रखीं। सीएम ने अधिकारियों को समस्याओं के यथासंभव शीघ्र समाधान के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य राज्य के प्रत्येक वर्ग और क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि वंचित एवं कमजोर वर्गों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक सशक्तीकरण के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
सीएम ने कहा कि पिछले करीब पांच वर्षों में उन्होंने चकराता, कालसी, जौनसार-बावर, उत्तरकाशी समेत पर्वतीय और सीमांत क्षेत्रों के अनेक दौरे किए हैं। इन दौरों का उद्देश्य दूरस्थ क्षेत्रों की वास्तविक परिस्थितियों को समझना और स्थानीय लोगों से सीधे संवाद करना रहा है।
उन्होंने बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के समानता और सामाजिक न्याय के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार इसी भावना के अनुरूप सभी वर्गों को समान अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है। अनुसूचित जनजाति समाज के लिए एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय, छात्रवृत्ति, पीएम-जनमन और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान जैसी योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, आवास, बिजली और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने आदि गौरव महोत्सव जैसे आयोजनों के माध्यम से जनजातीय संस्कृति, लोककला, हस्तशिल्प और परंपराओं को मंच दिए जाने की बात भी कही।
महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों का उल्लेख करते हुए सीएम ने कहा कि स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक शिल्प की मांग बढ़ रही है। समूहों को बिना ब्याज ऋण जैसी सुविधाओं से जोड़कर स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
इस दौरान विधायक सरिता आर्या, विधायक दुर्गेश्वर लाल, सचिव विनय शंकर पांडेय, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप समेत अधिकारी और विभिन्न क्षेत्रों से आए एससी-एसटी समाज के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

