अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के 9,93,886 पेंशनरों को सितंबर माह की 147 करोड़ 34 लाख 53 हजार रुपये की पेंशन वन क्लिक के माध्यम से जारी की। हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र, नींबूवाला में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने दिव्यांगजन सिविल सर्विस कोचिंग का शुभारंभ किया और विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले 23 वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानित किया। निबंध एवं पेंटिंग प्रतियोगिता में चयनित पांच छात्र-छात्राओं को भी पुरस्कार दिए गए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के वरिष्ठजनों के सम्मान, सुरक्षा और सुविधा की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। उन्होंने बताया कि सरकार वरिष्ठ नागरिकों को प्रतिमाह 1500 रुपये पेंशन दे रही है। पति-पत्नी दोनों को अलग-अलग पेंशन का लाभ दिया जा रहा है। वर्तमान में नौ लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिकों को 147 करोड़ रुपये से अधिक की पेंशन उपलब्ध कराई जा रही है।

उन्होंने कहा कि वरिष्ठजन परिवार के सुरक्षा कवच हैं। उनके सानिध्य से बच्चों को संस्कार और जीवन के आदर्श सीखने को मिलते हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी वरिष्ठजनों के उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करते हुए उनके कल्याण की शपथ भी दिलाई।

वृद्धाश्रमों का विस्तार

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के विभिन्न जिलों में वृद्धाश्रमों की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। वर्तमान में बागेश्वर, चमोली और उत्तरकाशी में राजकीय वृद्धाश्रम संचालित हैं। देहरादून, अल्मोड़ा और चंपावत में नए वृद्धाश्रमों का निर्माण कराया जा रहा है। हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल समेत विभिन्न क्षेत्रों में गैर-सरकारी संस्थाओं की ओर से भी वृद्धाश्रम संचालित किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम लागू किया गया है। दीनदयाल मातृ-पितृ तीर्थाटन योजना के तहत वरिष्ठजनों के लिए निशुल्क यात्रा की व्यवस्था है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से वरिष्ठजनों को मुफ्त उपचार की सुविधा भी मिल रही है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने परिसर में एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत पौधारोपण भी किया। इस अवसर पर विधायक सविता कपूर, दायित्वधारी राम चंद्र गौड़, मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. गोविंद बिष्ट समेत अन्य अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।