कारगिल विजय दिवस के अवसर पर आयोजित सैनिक सम्मान समारोह एवं कवि सम्मेलन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कारगिल युद्ध के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए वीर सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं और शहीदों के परिजनों को सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने सैनिक कल्याण, शहीद परिवारों और अग्निवीरों के भविष्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी देते हुए कहा कि सैनिकों का सम्मान और राष्ट्र की सुरक्षा राजनीति नहीं, बल्कि राष्ट्रधर्म का विषय है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कारगिल विजय दिवस भारतीय सेना के अदम्य साहस, पराक्रम और बलिदान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि कारगिल युद्ध में उत्तराखंड के 75 वीर जवानों ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया, जिनका त्याग सदैव प्रेरणा देता रहेगा।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय सेना आधुनिक हथियारों से सुसज्जित हो रही है और सीमावर्ती क्षेत्रों में रणनीतिक आधारभूत ढांचे का तेजी से विकास किया जा रहा है। वन रैंक-वन पेंशन, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक और रक्षा बजट में वृद्धि जैसे निर्णय सैनिकों के सम्मान के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने शहीदों के आश्रितों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दी है। वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों की सहायता राशि में भी बढ़ोतरी की गई है। शहीद परिवार के एक सदस्य को सरकारी सेवा में समायोजन, आवेदन की समय-सीमा दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष, नौकरी-पूर्व प्रशिक्षण और पुत्री विवाह सहायता जैसी योजनाएं भी संचालित की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों और पूर्व सैनिकों को राज्य परिवहन की बसों में निःशुल्क यात्रा तथा 25 लाख रुपये तक की संपत्ति खरीदने पर स्टाम्प शुल्क में 25 प्रतिशत की छूट दी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि परमवीर चक्र विजेताओं की अनुग्रह राशि 50 लाख रुपये से बढ़ाकर डेढ़ करोड़ रुपये कर दी गई है। देहरादून के गुनियाल गांव में सैन्य धाम का निर्माण अंतिम चरण में है, जबकि खटीमा-टनकपुर के बीच सैन्य स्मारक स्थापित करने की भी योजना है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अग्निवीरों के उज्ज्वल भविष्य के लिए भी प्रतिबद्ध है। देश का पहला अग्निवीर रोजगार सेल स्थापित किया जाएगा। पुलिस, वन विभाग और अन्य सरकारी सेवाओं में सेवामुक्त अग्निवीरों को प्राथमिकता देने के साथ उन्हें निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जाएगा। पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों को पर्वतीय क्षेत्रों में होमस्टे स्थापित करने तथा स्वरोजगार से जोड़ने के लिए विशेष सहायता देने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व सैनिकों की शस्त्र लाइसेंस संबंधी मांग पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है तथा सैन्य परिवारों से जुड़े भूमि विवादों के लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
कार्यक्रम में आयोजित कवि सम्मेलन का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि साहित्य और कविता राष्ट्रभक्ति की भावना को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम हैं। समारोह में राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक उमेश शर्मा काऊ, वीर सैनिक, पूर्व सैनिक, वीरांगनाएं, शहीदों के परिजन, सैन्य अधिकारी और बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
