उम्र भले ही 80 साल हो, लेकिन आस्था और हौसले के आगे उम्र भी छोटी पड़ जाती है। इसका जीवंत उदाहरण श्री हेमकुंड साहिब यात्रा पर पहुंचीं 80 वर्षीय श्रद्धालु माता जी ने पेश किया।
लाठी के सहारे कठिन पर्वतीय मार्ग तय कर माता जी ने श्री हेमकुंड साहिब के पवित्र धाम के दर्शन किए। यात्रा पूरी करने के बाद उनके चेहरे पर संतोष और श्रद्धा साफ झलक रही थी। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, “मन बहुत खुश हो गया, बहुत वधिया रहा।”
माता जी का यह जज्बा हजारों श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा है। उन्होंने साबित कर दिया कि यदि मन में अटूट विश्वास और श्रद्धा हो तो उम्र कभी भी आस्था के मार्ग में बाधा नहीं बनती।
श्री हेमकुंड साहिब की यात्रा हर वर्ष देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक आस्था का केंद्र होती है। 80 वर्ष की आयु में माता जी का यह साहस और समर्पण श्रद्धालुओं के बीच प्रेरणा का विषय बना हुआ है।
