Kiran Bhatt

विश्व प्रसिद्ध विश्व धरोहर फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान को शीतकाल के लिए पर्यटकों की आवाजाही के लिए बंद कर दिया गया है। इस वर्ष घाटी में रिकॉर्ड 35,261 पर्यटक पहुंचे। इनमें 34,996 भारतीय और 265 विदेशी पर्यटक शामिल हैं। एक जून को पर्यटकों के लिए खोली गई फूलों की घाटी 31 अक्तूबर को पर्यटन सत्र समाप्त होने के साथ बंद कर दी गई। इस बार बड़ी संख्या में पर्यटकों के पहुंचने से घाटी में पर्यटन गतिविधियां पूरे सीजन के दौरान गुलजार रहीं।

हिमालय की गोद में स्थित फूलों की घाटी अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता, दुर्लभ पुष्प प्रजातियों और जैव विविधता के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। समुद्रतल से करीब 3,500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह घाटी हर साल देश-विदेश के पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित करती है। मानसून के दौरान यहां खिलने वाले रंग-बिरंगे फूल घाटी को प्राकृतिक रंगों से सराबोर कर देते हैं। इसी अनुपम खूबसूरती को करीब से देखने के लिए हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं।

इस वर्ष भी फूलों की घाटी में पर्यटकों की अच्छी आमद रही। पूरे पर्यटन सत्र में कुल 35,261 लोगों ने घाटी का दीदार किया। इनमें भारतीय पर्यटकों की संख्या 34,996 रही, जबकि 265 विदेशी पर्यटक भी यहां की प्राकृतिक सुंदरता से रूबरू हुए। विदेशी पर्यटकों की मौजूदगी इस विश्व धरोहर स्थल की अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता को भी दर्शाती है।

पांच महीने तक रही पर्यटकों की आवाजाही

फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान को प्रतिवर्ष मौसम की अनुकूलता के आधार पर जून में पर्यटकों के लिए खोला जाता है। इस वर्ष एक जून को इसके द्वार पर्यटकों के लिए खोले गए थे। इसके बाद करीब पांच महीने तक यहां पर्यटकों की आवाजाही जारी रही। 31 अक्तूबर को पर्यटन सत्र समाप्त होने के साथ ही इसे शीतकाल के लिए बंद कर दिया गया है।

सर्दियों में अत्यधिक बर्फबारी और प्रतिकूल मौसम के कारण घाटी तक पहुंचने का मार्ग दुर्गम हो जाता है। ऐसे में पर्यटकों की सुरक्षा और प्राकृतिक पारिस्थितिकी के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए हर साल इसे निर्धारित अवधि के बाद बंद कर दिया जाता है।

जैव विविधता के लिए दुनिया में अलग पहचान

फूलों की घाटी यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। यहां सैकड़ों प्रजातियों के दुर्लभ और रंग-बिरंगे फूल पाए जाते हैं। घाटी में ब्रह्मकमल, ब्लू पॉपी, फेनकमल सहित कई आकर्षक पुष्प प्रजातियां पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहती हैं। इसके अलावा यहां की प्राकृतिक वनस्पतियां और हिमालयी जैव विविधता इसे प्रकृति प्रेमियों, शोधकर्ताओं और वनस्पति विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए भी खास बनाती हैं।

अब शीतकाल के दौरान घाटी बर्फ की सफेद चादर से ढक जाएगी। अगले पर्यटन सत्र में मौसम अनुकूल होने पर इसे फिर से पर्यटकों के लिए खोला जाएगा। तब एक बार फिर देश-विदेश के प्रकृति प्रेमियों को इस प्राकृतिक धरोहर की खूबसूरती निहारने का अवसर मिलेगा।