उत्तराखण्ड यूसीसी सेवाएं अब 22 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध, एआई से भी मिलेगा पंजीकरण में सहयोग

उत्तराखण्ड में लागू समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को आमजन के लिए और अधिक सरल एवं सुलभ बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अब यूसीसी से जुड़ी सभी सेवाएं अंग्रेजी के साथ-साथ भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 22 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराई गई हैं। इसके साथ ही आवेदक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की सहायता से यूसीसी की प्रक्रिया को समझते हुए स्वयं अपना पंजीकरण भी कर सकता है।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने यूसीसी लागू होने से पहले ही अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि पंजीकरण प्रक्रिया को पूरी तरह सरल, पारदर्शी और यूज़र-फ्रेंडली बनाया जाए, ताकि नागरिक बिना किसी सहायता के स्वयं आवेदन कर सकें। इन्हीं निर्देशों के क्रम में आईटीडीए (आईटीडीए) द्वारा यूसीसी की वेबसाइट को अंग्रेजी सहित आठवीं अनुसूची की सभी 22 भाषा असमिया, बंगाली, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मलयालम, मराठी, नेपाली, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु, उर्दू, सिंधी, बोडो, डोगरी, मैथिली, संथाली और मणिपुरी में विकसित किया गया है।

इस सुविधा के माध्यम से अब आवेदक अपनी मातृभाषा में यूसीसी के नियम, प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी प्राप्त कर सकता है और उसी भाषा में आवेदन भी कर सकता है। आवश्यकता पड़ने पर एआई आधारित सहायता प्रणाली भी आवेदन प्रक्रिया में मार्गदर्शन प्रदान कर रही है।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार पहले दिन से ही सरलीकरण से समाधान के सिद्धांत पर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि यूसीसी के क्रियान्वयन में यह सुनिश्चित किया गया कि आम नागरिक को पंजीकरण में किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। तकनीकी दक्षता और बहुभाषी सुविधा के चलते यूसीसी एक सफल डिजिटल मॉडल के रूप में सामने आई है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि बीते एक वर्ष में यूसीसी प्रक्रिया को लेकर एक भी शिकायत दर्ज नहीं हुई, जो इस प्रणाली की पारदर्शिता, विश्वसनीयता और तकनीकी उत्कृष्टता को दर्शाता है।

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