सिद्धपीठ मां कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेले में पंजाबी गायक दलेर मेहंदी के साथ कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के व्यवहार को लेकर विरोध के स्वर उठने लगे हैं। इस प्रकरण को उत्तराखंड की अतिथि-सत्कार की परंपरा के विपरीत बताते हुए मंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और भविष्य में पद की गरिमा के अनुरूप आचरण करने की मांग की गई है।
इस संबंध में जारी बयान में कहा गया कि उत्तराखंड की संस्कृति ‘अतिथि देवो भव’ की भावना पर आधारित है। ऐसे में प्रदेश सरकार के आयोजन में आमंत्रित कलाकार पर हजारों लोगों के सामने नशे में होने का आरोप लगाना उचित नहीं है। यदि मंत्री को कलाकार की प्रस्तुति को लेकर कोई शिकायत थी, तो आयोजकों के माध्यम से मामले की जांच कराई जा सकती थी।
बयान में कहा गया कि दलेर मेहंदी हाल ही में सर्जरी कराने के बावजूद अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत उत्तराखंड पहुंचे थे। ऐसे में सार्वजनिक मंच से उन पर आरोप लगाने के बजाय मामले की तथ्यात्मक जांच की जानी चाहिए थी। इस प्रकरण पर देश के विभिन्न कलाकारों और फिल्म जगत से जुड़ी हस्तियों की प्रतिक्रियाओं का हवाला देते हुए कहा गया कि घटना ने कलाकारों के सम्मान और सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदार व्यवहार को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
बयान जारी करने वालों ने कहा कि दलेर मेहंदी ने पूरे घटनाक्रम के दौरान संयम और शालीनता बनाए रखी। वहीं, इस मामले में भाजपा नेताओं और सिख-पंजाबी समाज से जुड़े भाजपा पदाधिकारियों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए गए।
मंत्री सुबोध उनियाल के पूर्व में सामने आए विवादों का उल्लेख करते हुए बयान में उनके सार्वजनिक व्यवहार को लेकर भी आपत्ति जताई गई। साथ ही कहा गया कि जनप्रतिनिधियों को सार्वजनिक मंचों पर अपनी भाषा और व्यवहार में संयम रखना चाहिए।
बयान में चेतावनी दी गई कि इस तरह के प्रकरणों का राजनीतिक असर पड़ सकता है। अंत में मांग की गई कि कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल पूरे मामले पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगें और भविष्य में अपने पद की गरिमा के अनुरूप व्यवहार सुनिश्चित करें।

