विजयदशमी के पावन पर्व पर भगवान केदारनाथ, द्वितीय केदार मदमहेश्वर और तृतीय केदार तुंगनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद होने की तिथियों की घोषणा की जाएगी। इसके साथ ही तीनों धामों की चल विग्रह उत्सव डोलियों के शीतकालीन गद्दीस्थलों तक पहुंचने का कार्यक्रम भी निर्धारित किया जाएगा।

परंपरा के अनुसार, विजयदशमी के अवसर पर मंदिरों में धार्मिक विधि-विधान के साथ कपाट बंद होने की तिथियां तय की जाती हैं। इसके बाद शीतकाल के दौरान भगवान की पूजा-अर्चना उनके निर्धारित शीतकालीन गद्दीस्थलों पर की जाएगी।

चारधाम यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ावों में शामिल केदारनाथ, मदमहेश्वर और तुंगनाथ धाम में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। सर्दियों में अधिक बर्फबारी और प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए इन धामों के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाते हैं। इसके बाद भगवान की उत्सव डोलियों को पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ शीतकालीन प्रवास स्थलों तक पहुंचाया जाता है।

कपाट बंद होने की तिथियों की घोषणा के साथ ही मंदिर समितियों और संबंधित व्यवस्थाओं को आगे की तैयारियों के लिए दिशा मिलेगी। श्रद्धालुओं की निगाहें अब विजयदशमी पर होने वाली घोषणा पर टिकी हैं।