चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग में नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। विपक्ष द्वारा भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाने के बाद सरकार ने पलटवार करते हुए कहा कि नर्सिंग अधिकारियों की नियुक्ति पूरी तरह नियमों के अनुरूप और पारदर्शी तरीके से की जा रही है, लेकिन विपक्ष तथ्यों को दरकिनार कर युवाओं को भ्रमित कर रहा है।
भर्ती उत्तराखंड अधीनस्थ नर्सिंग सेवा नियमावली 2022 के अनुसार
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने स्पष्ट किया कि नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती उत्तराखंड अधीनस्थ नर्सिंग (अराजपत्रित) सेवा (संशोधन) नियमावली, 2022 में निहित प्रावधानों के अनुरूप राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से संचालित की जा रही है।
उन्होंने बताया कि
- स्वास्थ्य विभाग में 103 पद,
- चिकित्सा शिक्षा विभाग में 587 पद
के लिए भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।
डॉ. रावत ने कहा कि राज्य सरकार लगातार प्रदेश के युवाओं को रोजगार के अवसर दे रही है, जिससे विपक्षी दल असहज हैं और इसी कारण वे झूठे आरोपों का सहारा ले रहे हैं।
पिछली बार दी गई थी एकमुश्त छूट, अब भर्ती नियमावली के अनुसार
मंत्री ने बताया कि पहले की भर्ती प्रक्रिया में विभाग में लंबे समय से भर्ती न होने तथा युवाओं की मांग को देखते हुए एक बार के लिए लिखित परीक्षा में छूट दी गई थी। उस समय चयन वर्षवार मेरिट के आधार पर पूरी पारदर्शिता के साथ किया गया था और अधिकांश चयनित अभ्यर्थी उत्तराखंड से ही थे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह छूट केवल एक बार दी गई थी। अब आगे की सभी नर्सिंग भर्तियाँ पूर्व नियमों के अनुसार लिखित परीक्षा के माध्यम से होंगी।
विपक्ष को आरोपों की बजाय अपने कार्यकाल की बताए उपलब्धि
नर्सिंग भर्ती पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल द्वारा लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. रावत ने कहा कि विपक्ष के पास अपने शासनकाल की उपलब्धियाँ बताने के लिए कुछ नहीं है, इसलिए वे अब युवाओं के भ्रम फैलाकर राजनीति करने में जुटे हैं।
उन्होंने कहा कि
- सरकार के जनकल्याणकारी कार्यों से विपक्ष बौखलाया हुआ है।
- जनता शिक्षित और समझदार है, वह जानती है कि उसका वास्तविक हितैषी कौन है।
मंत्री ने कहा कि विपक्ष का काम केवल आरोप लगाना रह गया है, लेकिन केवल आलोचना से सत्ता नहीं मिलती। उन्होंने विपक्षी दलों को चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे उत्तराखंड की जनता के हितैषी हैं तो अलग राज्य बनने के बाद अपने शासनकाल की उपलब्धियाँ जनता को बताएं।
