मां नंदा की जात यात्रा का महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया। परगना बधाण की देव डोली अपनी वापसी यात्रा के अंतिम पड़ाव सिद्धपीठ धाम देवराड़ा पहुंच गई, जहां परंपरा के अनुसार मां नंदा अब छह माह के लिए अपनी ननिहाल में विराजमान होंगी। डोली के देवराड़ा पहुंचते ही ढोल-दमाऊं की गूंज और मां नंदा के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने भावुक होकर मां नंदा का स्वागत किया।

इससे पहले देव डोली दिन के अंतिम पड़ाव भेंटा गांव पहुंची। यहां ग्रामीणों, थोकदारों और श्रद्धालुओं ने डोली का स्वागत किया। इसके बाद देवराड़ा पहुंचने पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह नजर आया। किसी के चेहरे पर आस्था की चमक थी तो किसी की आंखों में मां नंदा के ननिहाल पहुंचने की खुशी। विधिवत पूजा-अर्चना के बाद मां नंदा से क्षेत्र में सुख-शांति और समृद्धि की कामना की गई।

मां नंदा जात यात्रा की परंपरा के अनुसार यात्रा पूरी होने के बाद डोली छह माह के लिए देवराड़ा में विराजमान रहती है। डोली के यहां पहुंचने के साथ ही जात यात्रा के इस चरण का भावपूर्ण समापन हुआ।

कठिन ड्यूटी के लिए पुलिसकर्मी सम्मानित

जात यात्रा के दौरान हजारों श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही, यातायात, भीड़ नियंत्रण और कानून-व्यवस्था संभालने में चमोली पुलिस की अहम भूमिका रही। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और दुर्गम मार्गों के बावजूद पुलिसकर्मी लगातार ड्यूटी पर डटे रहे। पुलिस अधीक्षक चमोली सुरजीत सिंह पंवार ने अपर पुलिस अधीक्षक आशीष भारद्वाज और पुलिस उपाधीक्षक सुशील रावत को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। केंद्रीय समिति और व्यापार मंडल थराली ने भी पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र और मोमेंटो देकर उनके योगदान की सराहना की। एसपी ने कहा कि मां नंदा जात यात्रा में ड्यूटी केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास की सुरक्षा से जुड़ा दायित्व भी है।