राजकीय विश्वविद्यालयों में साइबर सुरक्षा होगी मजबूत, डीपीडीपी एक्ट के अनुपालन के दिए निर्देश

प्रदेश के राजकीय विश्वविद्यालयों में साइबर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। छात्र-छात्राओं तथा विश्वविद्यालयों के डिजिटल डाटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही भारत सरकार के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) एक्ट-2025 का अनुपालन भी कराया जाएगा। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने सभी राजकीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

समीक्षा बैठक में साइबर सुरक्षा पर विशेष जोर

उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने अपने शासकीय आवास पर राज्य विश्वविद्यालयों की समीक्षा बैठक ली। बैठक में उन्होंने विश्वविद्यालयों के वेब एप्लिकेशन को साइबर खतरों से सुरक्षित रखने तथा डाटा लीक जैसी घटनाओं की रोकथाम के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाने को कहा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में डिजिटल डाटा की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है, जिसके मद्देनजर सभी विश्वविद्यालयों को सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने होंगे।

डीपीडीपी एक्ट के तहत डाटा गोपनीयता पर रहेगा फोकस

मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2025 में लागू किए गए डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट के तहत साइबर सुरक्षा, डाटा गोपनीयता और ऑनलाइन धोखाधड़ी की रोकथाम के लिए प्रभावी प्रावधान किए गए हैं। विश्वविद्यालयों को भी छात्रों और संस्थानों के डाटा को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे, ताकि किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी से बचा जा सके।

गोद लिए गांवों की रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश

बैठक में विश्वविद्यालयों द्वारा गोद लिए गए गांवों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश भी दिए गए। इसके साथ ही प्रत्येक विश्वविद्यालय से 20-20 मेधावी छात्र-छात्राओं का चयन कर उनके सम्मान में विशेष कार्यक्रम आयोजित करने को कहा गया। चयनित विद्यार्थियों को राज्यपाल के हाथों सम्मानित किया जाएगा।

‘एक विश्वविद्यालय एक शोध’ योजना के तहत होगा प्रस्तुतिकरण

डॉ. रावत ने बताया कि ‘एक विश्वविद्यालय एक शोध’ योजना के अंतर्गत सभी विश्वविद्यालयों को अपने शोध कार्यों पर पांच मिनट का प्रस्तुतिकरण तैयार करना होगा। इन प्रस्तुतिकरणों को कुलाधिपति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे शोध कार्यों की गुणवत्ता और उपयोगिता का मूल्यांकन किया जा सके।

संस्कृत विश्वविद्यालय करेगा राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि संस्कृत विश्वविद्यालय हरिद्वार में देशभर के संस्कृत विश्वविद्यालयों की कार्यशाला आयोजित करेगा। इस कार्यशाला में देववाणी संस्कृत के संरक्षण, संवर्द्धन और उसके प्रचार-प्रसार को लेकर विभिन्न विश्वविद्यालय अपने विचार और प्रस्तुतिकरण साझा करेंगे।

साइबर सुरक्षा और परीक्षा संचालन पर कुलपतियों ने रखा पक्ष

समीक्षा बैठक में सभी राजकीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने साइबर सुरक्षा और परीक्षा संचालन से संबंधित अपने-अपने विश्वविद्यालयों की तैयारियों का प्रस्तुतिकरण दिया। साथ ही भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए नई कार्ययोजना तैयार करने पर सहमति जताई गई।

छात्रसंघ चुनावों में 50 प्रतिशत पद छात्राओं के लिए आरक्षित करने पर सहमति

बैठक में आगामी छात्रसंघ चुनावों में 50 प्रतिशत पद छात्राओं के लिए आरक्षित रखने के प्रस्ताव पर भी सहमति बनी। इसे उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्राओं की भागीदारी और नेतृत्व को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अधिकारियों और कुलपतियों ने की बैठक में प्रतिभागिता

बैठक में सचिव उच्च शिक्षा बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम, राज्यपाल के सचिव रविनाथ रमन, कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डी.एस. रावत, श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एन.के. जोशी, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस.पी.एस. बिष्ट, संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकांत पाण्डेय, तकनीकी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. तृप्ता ठाकुर, अपर सचिव उच्च शिक्षा मनुज गोयल, निदेशक उच्च शिक्षा डॉ. वी.एन. खाली, उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. आशुतोष भट्ट सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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