कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल ने उत्तराखंड में किसी भी तरह की गुटबाजी से इनकार करते हुए दावा किया कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और आगामी विधानसभा चुनाव में सत्ता में वापसी करेगी। उन्होंने राम मंदिर और बदरीनाथ धाम में चढ़ावे में कथित हेराफेरी के मुद्दे पर भाजपा, आरएसएस और केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए दोनों मामलों की निष्पक्ष जांच सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की निगरानी में कराने की मांग की।
प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान वेणुगोपाल ने कहा कि उत्तराखंड कांग्रेस के सभी नेता और कार्यकर्ता एकजुट होकर चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सत्ता विरोधी माहौल है और जनता इस बार सरकार बदलने का मन बना चुकी है। उन्होंने विश्वास जताया कि कांग्रेस मजबूत संगठन और जनसमर्थन के दम पर चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करेगी।
राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित विवाद का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की निगरानी में कराई जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भगवान राम के नाम पर राजनीति करने वाले अब चढ़ावे की चोरी जैसे गंभीर आरोपों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार की पहल पर हुआ था, ऐसे में इस मामले पर जवाबदेही तय होनी चाहिए।
वेणुगोपाल ने बदरीनाथ धाम में चढ़ावे में कथित हेराफेरी के मामले को भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सरकार भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में विफल रही है और कई मंत्री तथा विधायक भी गंभीर आरोपों के घेरे में हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इन मुद्दों को संसद के आगामी मानसून सत्र में प्रमुखता से उठाएगी।
वेणुगोपाल ने बताया कि विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की घोषणा-पत्र (मेनिफेस्टो) समिति प्रदेशभर में विभिन्न वर्गों के लोगों से संवाद करेगी। उनके सुझावों के आधार पर जनहित से जुड़े मुद्दों को पार्टी के घोषणा-पत्र में शामिल किया जाएगा, ताकि जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप चुनावी एजेंडा तैयार किया जा सके।
