Uttarakhand: नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विशेष सत्र में मुख्यमंत्री धामी का संबोधन, सर्वसम्मति से प्रस्ताव लाने की अपील

विधानसभा के विशेष सत्र नारी सम्मान-लोकतंत्र में अधिकार में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विस्तृत संबोधन दिया। उन्होंने महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने के उद्देश्य से लाए गए इस विधेयक को शीघ्र लागू करने के लिए केंद्र सरकार के प्रयासों का समर्थन करते हुए सदन के समक्ष सर्वसम्मत संकल्प पारित करने का प्रस्ताव रखा।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत राज्य आंदोलनकारियों और उत्तराखण्ड की महान महिला विभूतियों को नमन करते हुए की। उन्होंने गौरा देवी, टिंचरी माई, बिशनी देवी शाह, जशूली शौक्याण, कुंती वर्मा, भागीरथी देवी, मंगला देवी, हंसा धनाई, सरला बहन, बेलमती चौहान, सुशीला बहन और कमला पंत जैसी प्रेरणादायक महिलाओं के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि मातृशक्ति के सशक्तिकरण के मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठकर एकजुटता दिखानी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन संस्कृति में नारी को देवी स्वरूप मानकर उसकी आराधना की जाती है। माँ दुर्गा, माँ लक्ष्मी और माँ सरस्वती के रूप में नारी शक्ति के विभिन्न स्वरूपों का सम्मान किया जाता है। उन्होंने इतिहास और आधुनिक भारत के उदाहरण देते हुए कहा कि रानी लक्ष्मीबाई, सावित्रीबाई फुले और कल्पना चावला जैसी हस्तियों ने नारी शक्ति का परचम ऊंचा किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज नारी शक्ति केवल सहभागिता तक सीमित नहीं है, बल्कि नेतृत्व की भूमिका निभा रही है। उन्होंने चंद्रयान-3 मिशन, खेल, रक्षा और अन्य क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को इसका प्रमाण बताया। उत्तराखण्ड की वीरांगनाओं—तीलू रौतेली, रानी जिया रानी और गौरा देवी—का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश की महिलाएं साहस और समर्पण की प्रतीक रही हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाया गया, जिसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान है। उन्होंने इसे केवल संख्या बढ़ाने का प्रयास नहीं, बल्कि नीति निर्माण में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया।

उन्होंने कहा कि इस विधेयक को पारित कराने के लिए केंद्र सरकार द्वारा विशेष प्रयास किए गए, लेकिन विपक्षी दलों के कारण इसे पारित नहीं किया जा सका। मुख्यमंत्री ने इस पर खेद जताते हुए कहा कि यह देश की आधी आबादी के अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है, जिस पर सभी को एकजुट होकर निर्णय लेना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने अंत में सदन से अपील की कि नारी सशक्तिकरण के इस ऐतिहासिक प्रयास का समर्थन करते हुए सर्वसम्मति से संकल्प पारित किया जाए, ताकि महिलाओं को उनका उचित अधिकार मिल सके और देश के विकास में उनकी भागीदारी और मजबूत हो सके।

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