4 जनवरी 2027 को होगा अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन, विशेष अभियान में मिले फार्म-6 के 1,00,744 आवेदन
देहरादून। उत्तराखंड में 23 अक्टूबर से सभी जिलों में ईवीएम-वीवीपैट की प्रथम स्तरीय जांच (एफएलसी) शुरू होगी। वहीं, आगामी एक जनवरी 2027 की अर्हता तिथि के आधार पर प्रदेश में 12 नवंबर से विशेष संक्षिप्त मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान शुरू किया जाएगा। इसके तहत 12 नवंबर को मतदाता सूची का प्रारूप प्रकाशित होगा, जबकि अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन चार जनवरी 2027 को किया जाएगा।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम की अध्यक्षता में गुरुवार को मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई। इसमें राजनीतिक दलों को ईवीएम-वीवीपैट की प्रथम स्तरीय जांच और विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण 2027 के प्रस्तावित कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी दी गई। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि एफएलसी की प्रक्रिया भारत निर्वाचन आयोग के निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार सभी जिलों में शुरू होगी। इसमें राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में 12 से 20 अक्टूबर तक चलाए गए विशेष अभियान के दौरान फार्म-6 के 1,00,744 आवेदन प्राप्त हुए हैं। मतदाता सूची पुनरीक्षण के तहत 12 नवंबर से 11 दिसंबर तक दावे और आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी। वहीं, 28 दिसंबर तक दावे-आपत्तियों का निस्तारण और सुनवाई की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद चार जनवरी 2027 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी।
बैठक में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को फार्म-7 आवेदन की सीमा के बारे में भी जानकारी दी गई। बताया गया कि दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की पूरी अवधि में कोई मतदाता आपत्तिकर्ता के रूप में अधिकतम 10 फार्म-7 आवेदन प्रस्तुत कर सकता है। वहीं, मतदाता सूची के सतत अद्यतन की अवधि में कोई व्यक्ति प्रति माह अधिकतम पांच फार्म-7 आवेदन दे सकता है।
बैठक में अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे, संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रकाश चंद्र दुम्का, उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी किशन सिंह नेगी और सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास मौजूद रहे। राजनीतिक दलों की ओर से भाजपा के राजकुमार पुरोहित, कांग्रेस के अमेंद्र बिष्ट, बसपा के सतेंद्र चोपड़ा, आम आदमी पार्टी के श्याम बाबू पांडेय और माकपा के अनंत आकाश ने प्रतिभाग किया।

