विद्यालयी शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के वार्षिक स्थानांतरण को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। मेडिकल प्रमाणपत्र के आधार पर स्थानांतरण का लाभ लेने वाले शिक्षकों को अब दोबारा स्वास्थ्य परीक्षण से गुजरना होगा। इसके लिए निदेशालय स्तर पर विशेष मेडिकल बोर्ड गठित किया जाएगा, जो शिक्षकों और उनके आश्रितों के स्वास्थ्य दावों का सत्यापन करेगा। वहीं गंभीर बीमारी से ग्रस्त अथवा शारीरिक रूप से कार्य करने में असमर्थ शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी करने के लिए शिक्षा विभाग को 55 दिन का अतिरिक्त समय भी मंजूर किया है।

शिक्षकों के वार्षिक स्थानांतरण तैयारियां पूरी

विद्यालयी शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने बताया कि राज्य सरकार शिक्षकों के वार्षिक स्थानांतरण के लिए पूरी तरह तैयार है और विभागीय स्तर पर सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि स्थानांतरण प्रक्रिया को निष्पक्ष एवं पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं।

विशेष मेडिकल बोर्ड गठित करने के निर्देश

उन्होंने कहा कि मेडिकल आधार पर मिलने वाली छूट का दुरुपयोग किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके लिए विद्यालयी शिक्षा महानिदेशक को निदेशालय स्तर पर विशेष मेडिकल बोर्ड गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। यह बोर्ड मेडिकल प्रमाणपत्र के आधार पर स्थानांतरण चाहने वाले शिक्षकों का दोबारा स्वास्थ्य परीक्षण करेगा।

परिजनों का भी होगा स्वास्थ्य परीक्षण

मंत्री ने बताया कि केवल शिक्षक ही नहीं, बल्कि जिन माता-पिता, सास-ससुर, पति-पत्नी अथवा बच्चों की गंभीर बीमारी का हवाला देकर स्थानांतरण का आवेदन किया गया है, उनका भी स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाएगा।

स्वास्थ्य प्रमाणपत्रों की प्रमाणिकता का सत्यापन

इसके अलावा राज्य स्तरीय चिकित्सा बोर्ड द्वारा जारी स्वास्थ्य प्रमाणपत्रों की प्रमाणिकता का भी सत्यापन होगा। यदि जांच में प्रमाणपत्र फर्जी या तथ्यों के विपरीत पाया जाता है तो संबंधित शिक्षक के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए नई व्यवस्था लागू

डा. रावत ने कहा कि विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि पूर्व वर्षों में कुछ शिक्षकों ने फर्जी मेडिकल प्रमाणपत्रों के आधार पर स्थानांतरण अधिनियम में छूट लेकर अपनी पसंद के विद्यालयों में तैनाती हासिल की। ऐसी अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए नई व्यवस्था लागू की जा रही है।

इन शिक्षकों और कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति

उन्होंने यह भी कहा कि जो शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी वास्तव में गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं अथवा शारीरिक रूप से अपने दायित्वों का निर्वहन करने में असमर्थ हैं, उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाएगी। इसके लिए सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को अपने-अपने जनपदों में ऐसे कर्मचारियों की सूची तैयार कर शीघ्र निदेशालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आवश्यक कार्रवाई समयबद्ध ढंग से की जा सके।

55 दिन का अतिरिक्त समय मिला

शिक्षा मंत्री ने बताया कि विभाग ने शिक्षकों के तबादलों के लिए समय विस्तार और स्थानांतरण अधिनियम से छूट की मांग कार्मिक विभाग से की थी। इस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभाग को स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी करने के लिए 55 दिन का अतिरिक्त समय देने की मंजूरी प्रदान कर दी है। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे और विद्यालयों में रिक्त पदों के सापेक्ष शिक्षकों की तैनाती की जाएगी।