विश्व प्रसिद्ध श्री बद्रीनाथ धाम के ग्रीष्मकालीन कपाट खुलने की पावन प्रक्रिया का आज विधिवत शुभारम्भ हो गया। इसी क्रम में आदिगुरु शंकराचार्य की डोली एवं पौराणिक गाडू घड़ा कलश यात्रा आज धार्मिक अनुष्ठानों, वैदिक मंत्रोच्चार और भव्यता के साथ ज्योतिर्मठ से प्रस्थान कर पाण्डुकेश्वर स्थित योग ध्यान बद्री मंदिर पहुंच गई।
शीतकाल में आदिगुरु शंकराचार्य जी की डोली ज्योतिर्मठ में प्रवास करती है। निर्धारित परंपरा के अनुसार 21 अप्रैल को डोली ने गाडू घड़ा कलश यात्रा के साथ पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच धाम की ओर प्रस्थान किया। इस दौरान मार्ग में श्रद्धालुओं का उत्साह देखने लायक रहा और जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर डोली का स्वागत किया। यात्रा मार्ग पर सुरक्षा के भी व्यापक प्रबंध किए गए थे।
गाडू घड़ा कलश यात्रा का विशेष धार्मिक महत्व
बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद भगवान बद्रीविशाल के महाभिषेक में तिल के तेल का विशेष महत्व होता है। यह पवित्र तेल टिहरी राजदरबार में सुहागिन महिलाओं द्वारा पारंपरिक विधि से तैयार किया जाता है। इसके बाद डिम्मर गांव के डिमरी आचार्य इस तेल को विशेष कलश में भरकर बद्रीनाथ धाम तक लेकर जाते हैं, जिसे ‘गाडू घड़ा’ कहा जाता है।
यह यात्रा कपाट उद्घाटन की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण और पावन चरण मानी जाती है। आदिगुरु शंकराचार्य जी की डोली भी इसी यात्रा के साथ पाण्डुकेश्वर तक पहुंचती है।
पाण्डुकेश्वर स्थित योग ध्यान बद्री मंदिर शीतकाल में भगवान उद्धव और कुबेर का प्रवास स्थल होता है। यहां पहुंचने के बाद अब भगवान उद्धव एवं कुबेर की डोलियां भी इस यात्रा के साथ बद्रीनाथ धाम के लिए प्रस्थान करेंगी।
इस धार्मिक यात्रा के साथ ही बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु इस पावन अवसर का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। यह यात्रा आगामी कपाट उद्घाटन के ऐतिहासिक और धार्मिक उत्सव की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक बन चुकी है।
