Uttarakhand: मुख्यमंत्री धामी के निर्देश पर एफडीए की बड़ी पहल, इस्तेमाल किए गए तेल पर सख्त निगरानी

उत्तराखण्ड खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) आम जनता को सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक भोजन उपलब्ध कराने के लिए लगातार कड़े कदम उठा रहा है। सरकार ने साफ कर दिया है कि राज्य में खाद्य तेल का दोबारा उपयोग किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इसे केवल नियमों की पालना भर नहीं, बल्कि नागरिकों की सेहत की सुरक्षा का संकल्प बताया है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं है। इस्तेमाल किए गए तेल का दोबारा उपयोग रोकने का अभियान एक जागरूकता आंदोलन के रूप में सामने आया है। उत्तराखण्ड ने रूको को न सिर्फ लागू किया, बल्कि इसे सामाजिक जिम्मेदारी का मॉडल बनाकर देश के सामने नई मिसाल पेश की है। हमारी कोशिश है कि स्वस्थ उत्तराखण्ड का लक्ष्य जल्द से जल्द प्राप्त किया जा सके।

स्वास्थ्य सचिव एवं आयुक्त एफडीए डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि प्रदेश भर में फूड बिजनेस ऑपरेटरों, होटलों, रेस्टोरेंटों, ढाबों और खाद्य कारोबारियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है ताकि एक बार उपयोग हुआ तेल खाद्य श्रृंखला में वापसी न कर सके। उन्होंने कहा कि अब आम जनमानस भी इस मुद्दे को लेकर पहले से ज्यादा सजग और संवेदनशील हुआ है।

एफडीए के अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने कहा कि 2018 की राष्ट्रीय बायोफ्यूल नीति के तहत इस्तेमाल हुए खाद्य तेल को बायोडीज़ल में बदलने को बढ़ावा दिया जा रहा है और रूको इसी दिशा में एक सशक्त आपूर्ति तंत्र के रूप में विकसित हो रहा है। उत्तराखण्ड ने इसे मिशन मोड में लागू कर खुद को देश के मॉडल राज्यों में शामिल कर लिया है।

उन्होंने बताया कि 2019 में जहाँ रूको मॉडल के तहत मात्र 600 लीटर इस्तेमाल किया गया तेल एकत्र हो सका था, वहीं पिछले पाँच वर्षों में यह आंकड़ा बढ़कर 1,06,414 किलो तक पहुँच गया। चारधाम यात्रा-2025 के दौरान भी इस थीम को अपनाते हुए 1,200 किलो उपयोग किया हुआ तेल संग्रहित कर बायोफ्यूल में परिवर्तित किया गया।

एफडीए अब इस अभियान को गढ़वाल और कुमाऊँ मंडलों में भी चरणबद्ध तरीके से विस्तार दे रहा है। उद्देश्य है। खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता और इस्तेमाल किए गए तेल के सुरक्षित पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना। सरकार और विभाग का मानना है कि यह पहल न केवल खाद्य गुणवत्ता सुनिश्चित करेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *