उत्तराखंड के नन्हे पर्वतारोहियों 9 वर्षीय रियांश पंत और 10 वर्षीय प्रिशा रावत ने अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो पर तिरंगा फहराकर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। दोनों बाल पर्वतारोहियों ने 22 अगस्त को 5,895 मीटर ऊंची चोटी का सफल आरोहण किया। मंगलवार को दोनों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री आवास में मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने दोनों को उनकी उपलब्धि पर बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इतनी कम उम्र में माउंट किलिमंजारो जैसी चुनौतीपूर्ण चोटी को फतह करना बच्चों के साहस, दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास को दर्शाता है। दोनों ने अपनी उपलब्धि से उत्तराखंड का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। उनकी सफलता प्रदेश के अन्य बच्चों और युवाओं को भी बड़े लक्ष्य निर्धारित कर उन्हें हासिल करने के लिए प्रेरित करेगी।
अल्मोड़ा के रियांश और नैनीताल की प्रिशा
9 वर्षीय मास्टर रियांश पंत अल्मोड़ा के चीनाखान के रहने वाले हैं, जबकि 10 वर्षीय प्रिशा रावत नैनीताल जिले के बैलपड़ाव की निवासी हैं। दोनों ने 22 अगस्त को तंजानिया में स्थित माउंट किलिमंजारो की चोटी पर सफलतापूर्वक पहुंचकर वहां तिरंगा फहराया था। किलिमंजारो समुद्र तल से 5,895 मीटर की ऊंचाई पर स्थित अफ्रीका की सबसे ऊंची पर्वत चोटी है।
बच्चों की उपलब्धि से बढ़ा प्रदेश का मान
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड के बच्चों और युवाओं में प्रतिभा, साहस और सामर्थ्य की कोई कमी नहीं है। प्रदेश के युवा पर्वतारोहण, खेल और अन्य साहसिक गतिविधियों में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। सीमित उम्र में रियांश और प्रिशा की यह उपलब्धि भी इसी प्रतिभा और जज्बे का उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवा प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और उन्हें अपनी क्षमता प्रदर्शित करने के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रही है। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के बच्चे और युवा अपनी प्रतिभा को निखारकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड का नाम रोशन करें।
तिरंगा फहराकर दिया साहस का संदेश
माउंट किलिमंजारो पर तिरंगा फहराने वाले दोनों नन्हे पर्वतारोहियों की उपलब्धि को मुख्यमंत्री ने प्रदेश के लिए गौरव का विषय बताया। उन्होंने कहा कि रियांश और प्रिशा ने कम उम्र में कठिन लक्ष्य को हासिल कर यह संदेश दिया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास के साथ उम्र किसी भी उपलब्धि की राह में बाधा नहीं बनती।
