अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के एक दिन बाद और बजट सत्र के पहले ही दिन राज्य सरकार ने मातृशक्ति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता स्पष्ट कर दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा प्रस्तुत बजट में महिलाओं की बेहतरी और सशक्तिकरण से जुड़ी कई योजनाओं के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
महिला समानता के लिहाज से महत्वपूर्ण जेंडर बजट का आकार इस वर्ष बढ़ाया गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि राज्य सरकार महिलाओं के कल्याण के लिए अपने प्रयासों को और तेज करने जा रही है।
जेंडर बजट में हुई बढ़ोतरी
पिछले वर्ष राज्य सरकार ने 16,961.32 करोड़ रुपये का जेंडर बजट प्रस्तुत किया था। वहीं इस वर्ष मुख्यमंत्री धामी ने बजट पेश करते हुए बताया कि 19,692.02 करोड़ रुपये का जेंडर बजट प्रस्तावित किया गया है।
इस बढ़ोतरी से साफ है कि राज्य सरकार महिलाओं के विकास और सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं को और अधिक मजबूती देने के लिए प्रतिबद्ध है।
महिलाओं से जुड़ी योजनाओं के लिए बजट प्रावधान
सरकार ने प्रसूता महिलाओं, बेटियों की सुरक्षा और महिलाओं के पोषण व सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी कई योजनाओं के लिए बजट में प्रावधान किया है।
- निर्भया फंड – 112.02 करोड़ रुपये
- मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट योजना – 30 करोड़ रुपये
- मुख्यमंत्री बाल पोषण योजना – 25 करोड़ रुपये
- वात्सल्य योजना – 15 करोड़ रुपये
- मुख्यमंत्री महिला पोषण योजना – 13.44 करोड़ रुपये
- ईजा-बोई शगुन योजना – 14.13 करोड़ रुपये
- निराश्रित विधवाओं की पुत्रियों के विवाह हेतु अनुदान – 5 करोड़ रुपये
- मुख्यमंत्री बाल एवं महिला बहुमुखी विकास निधि – 8 करोड़ रुपये
- आपदा सखी योजना – 2 करोड़ रुपये
मां और बच्चों के पोषण पर विशेष ध्यान
राज्य सरकार ने मां और बच्चों के पोषण को ध्यान में रखते हुए भी बजट में पर्याप्त प्रावधान किए हैं।
सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0 योजना के तहत 598.33 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इस योजना के माध्यम से छह माह से लेकर छह वर्ष तक के लगभग 7.33 लाख बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से अनुपूरक पोषाहार दिया जा रहा है।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री पोषण मिशन के लिए भी लगभग 149.45 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है, जिससे बच्चों के साथ-साथ माताओं के पोषण पर भी ध्यान दिया जा सके।
महिलाओं के कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता
कुल मिलाकर बजट में महिलाओं से जुड़ी योजनाओं के लिए बढ़ाए गए प्रावधान यह दर्शाते हैं कि राज्य सरकार नारी शक्ति के सशक्तिकरण, सुरक्षा और सामाजिक कल्याण को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल कर रही है।
