चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ मंदिर के कपाट शनिवार, 17 अक्टूबर को विधि-विधान और धार्मिक परंपराओं के अनुसार शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। अब भगवान रुद्रनाथ की पूजा-अर्चना अगले छह माह तक गोपेश्वर स्थित श्री गोपीनाथ मंदिर में होगी। रविवार को भगवान की डोली ज्वाला मंदिर देवलधार में रात्रि प्रवास करेगी, जबकि 19 अक्टूबर को शीतकालीन गद्दीस्थल गोपीनाथ मंदिर पहुंचेगी।
हिमालय की दिव्य वादियों में स्थित रुद्रनाथ मंदिर में कपाट बंद होने से पहले विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक और श्रृंगार पूजा की गई। पंडित आचार्य हरीश भट्ट ने धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए। इस दौरान रुद्री पाठ भी किया गया। भगवान रुद्रनाथ के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।
मंदिर में शनिवार शाम पांच बजे से कपाट बंद करने की प्रक्रिया शुरू हुई। विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों और परंपराओं के निर्वहन के बाद रात करीब आठ बजे मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। इसके साथ ही इस वर्ष की रुद्रनाथ धाम की यात्रा संपन्न हो गई।
19 अक्टूबर को गोपीनाथ मंदिर पहुंचेगी डोली
भगवान रुद्रनाथ की शीतकालीन यात्रा के तहत 18 अक्टूबर को देवडोली ज्वाला मंदिर, देवलधार में रात्रि प्रवास करेगी। इसके बाद 19 अक्टूबर को डोली गोपेश्वर स्थित श्री गोपीनाथ मंदिर पहुंचेगी। अगले छह माह तक श्रद्धालु यहीं भगवान रुद्रनाथ के दर्शन कर सकेंगे और पूजा-अर्चना संपन्न होगी।

