सोशल मीडिया पर अपनी अलग पहचान बनाने वाले और भंडारे वाले बाबा के नाम से लाखों लोगों के बीच लोकप्रिय रमाशंकर गुप्ता की अंतिम यात्रा भावुक माहौल में संपन्न हुई। परिजनों के अंतिम संस्कार में नहीं पहुंचने पर हरिद्वार पुलिस ने मानवता और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार कराया। पुलिस की इस पहल की व्यापक सराहना हो रही है।

जानकारी के अनुसार, रमाशंकर गुप्ता अपनी सहज शैली और “भंडारे वाले बाबा” के रूप में सोशल मीडिया पर लाखों लोगों के चेहरों पर मुस्कान बिखेरने के लिए जाने जाते थे। उनके वीडियो को करोड़ों बार देखा गया और उन्होंने बड़ी संख्या में लोगों का स्नेह अर्जित किया। हालांकि, उनके निधन के बाद अंतिम विदाई के समय अपेक्षित भीड़ नहीं जुट सकी, जिससे माहौल और अधिक भावुक हो गया।

पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब यह स्पष्ट हुआ कि किसी कारणवश उनके परिजन अंतिम संस्कार के लिए उपस्थित नहीं हो सके हैं, तब हरिद्वार पुलिस ने आगे बढ़कर परिवार की भूमिका निभाई। पुलिस कर्मियों ने पूरे सम्मान और धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए उनका अंतिम संस्कार कराया तथा उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

हरिद्वार पुलिस की इस संवेदनशील पहल ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि पुलिस की भूमिका केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत के समय मानवीय दायित्व निभाना भी उसकी जिम्मेदारी है। पुलिस ने अपने इस व्यवहार से यह साबित किया कि वर्दी केवल कर्तव्य का प्रतीक नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना और इंसानियत का भी परिचायक है।

स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर भी पुलिस की इस पहल की सराहना की जा रही है। लोगों का कहना है कि इंसान भले इस दुनिया से चला जाए, लेकिन उसके अच्छे कर्म और उसकी पहचान हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहती है। भंडारे वाले बाबा की स्मृतियां भी इसी तरह लोगों के बीच बनी रहेंगी।