उत्तराखंड सरकार की ओर से करीब 7,000 बीघा सरकारी जमीन निजी निवेशकों को 90 साल तक की लीज पर देने के फैसले को लेकर कांग्रेस ने गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रदेश कांग्रेस चार्जशीट कमेटी के अध्यक्ष करन माहरा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाले उत्तराखंड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड (UIIDB) के जरिये बेशकीमती सरकारी जमीन को बड़े कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा, “मुख्यमंत्री नाम से, प्रॉपर्टी डीलर काम से” काम कर रहे हैं।

शनिवार को होटल इंद्रलोक में प्रदेश कांग्रेस चार्जशीट कमेटी की पत्रकार वार्ता में करन माहरा ने कहा कि सरकार ने उद्यान विभाग, पोटैटो प्रोजेक्ट, ब्रीडिंग गार्डन समेत विभिन्न विभागों की करीब 7,000 बीघा खाली या कम उपयोग वाली सरकारी भूमि का लैंड बैंक तैयार किया है। इसे निजी निवेशकों को लंबी अवधि की लीज पर देने का प्रावधान किया गया है।

माहरा ने कहा कि आम नागरिकों के लिए जमीन खरीदने की सीमा 250 वर्गमीटर निर्धारित है, जबकि चुनिंदा कॉरपोरेट कंपनियों को हजारों बीघा सरकारी जमीन 90 साल के लिए देने का प्रावधान किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि व्यावसायिक उपयोग वाली जमीन का लीज रेंट कृषि भूमि के सर्किल रेट के आधार पर तय करने से सरकार को राजस्व का नुकसान नहीं होगा?

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्ताव में फाइव स्टार होटल, लग्जरी रिसॉर्ट, विला, कमर्शियल टाउनशिप, वेलनेस सेंटर और निजी स्कूल जैसी परियोजनाओं के लिए जमीन देने की व्यवस्था है। लीज की जमीन को सब-लीज और बंधक रखकर ऋण लेने की अनुमति देने पर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए। माहरा ने कहा कि इससे भविष्य में लीजहोल्ड जमीन को फ्रीहोल्ड में बदलकर निजी हाथों में जाने की आशंका है।

स्थानीय युवाओं और पंचायतों के हक की अनदेखी का आरोप

माहरा ने कहा कि सरकारी और सामूहिक उपयोग की भूमि पर पहला अधिकार स्थानीय युवाओं, ग्राम पंचायतों और सहकारी संस्थाओं का होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इस नीति से जुड़े फैसले करीब डेढ़ साल तक जनता से छिपाए।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सरकार पर राज्य की बेशकीमती भूमि को खुर्द-बुर्द करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपने कार्यकाल में प्रदेश की सरकारी जमीन को अपने चहेतों को कौड़ियों के भाव देने का काम किया है।

भू-कानून को लेकर भी सरकार पर निशाना

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि सरकार ने स्थानीय लोगों के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों का हनन किया है। उन्होंने UIIDB के गठन पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इसके जरिये प्रदेश की बेशकीमती जमीनों को कॉरपोरेट घरानों के हाथों सौंपने का रास्ता तैयार किया गया है।

आर्य ने जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट में पर्यटन सुविधाओं को निजी कंपनी को 15 वर्ष के लिए दिए जाने को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने टेंडर प्रक्रिया, कंपनियों के आपसी संबंध और सार्वजनिक सड़क पर शुल्क वसूली को लेकर सरकार से जवाब मांगा।

अस्पताल की जमीन का आवंटन रद्द करने पर भी सवाल

चार्जशीट कमेटी के सदस्य मनोज रावत ने स्वास्थ्य विभाग को विश्वास में लिए बिना करीब 23,137 वर्गमीटर भूमि के आवंटन को रद्द किए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने संबंधित कंपनियों की योग्यता और वित्तीय स्थिति पर भी सवाल उठाए। रावत ने आरोप लगाया कि तकनीकी रूप से अयोग्य कंपनी को वित्तीय बोली में शामिल करने और भूमि का अनंतिम आवंटन देने से टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।

पत्रकार वार्ता में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, सहप्रभारी सुरेंद्र शर्मा, चार्जशीट कमेटी के सदस्य मनोज रावत, डॉ. प्रेम बहुखंडी और डॉ. प्रतिमा सिंह समेत प्रदेश महामंत्री संगठन राजेंद्र भंडारी और अमरजीत सिंह मौजूद रहे।