बद्रीनाथ धाम में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित हेराफेरी के मामले को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार और श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) पर निशाना साधते हुए उच्चस्तरीय न्यायिक जांच की मांग तेज कर दी है। बद्रीनाथ से कांग्रेस विधायक लखपत सिंह बुटोला ने कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच केवल उत्तराखंड हाईकोर्ट के तीन सिटिंग जजों की समिति से ही संभव है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार जनता की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है और विभागीय जांच पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
राजधानी में आयोजित पत्रकार वार्ता में विधायक लखपत सिंह बुटोला ने कहा कि बद्रीनाथ धाम करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और वहां चढ़ावे में कथित हेराफेरी का मामला केवल वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि सनातन धर्मावलंबियों की आस्था पर भी गहरा आघात है। उन्होंने कहा कि सरकार को तत्काल हाईकोर्ट के तीन सिटिंग जजों की विशेष समिति गठित कर समयबद्ध और निष्पक्ष जांच करानी चाहिए।
पत्रकार वार्ता के दौरान बुटोला भावुक भी नजर आए। उन्होंने कहा कि वह उस पवित्र भूमि का प्रतिनिधित्व करते हैं जहां भगवान विष्णु का बैकुंठ धाम और श्री हेमकुंड साहिब स्थित है। ऐसे पवित्र स्थलों पर चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की खबरों से उनका मन अत्यंत व्यथित है और देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं।
उन्होंने सरकार की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि विभागीय या स्थानीय स्तर की जांच पर उन्हें भरोसा नहीं है। सरकार पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि एक छोटे कर्मचारी को बलि का बकरा बनाकर बड़े जिम्मेदार लोगों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना था कि बीकेटीसी के सदस्यों की नियुक्ति सरकार करती है, इसलिए यदि मंदिर समिति में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उसकी जवाबदेही भी सरकार की बनती है।
विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष के कई विधायकों की अपनी ही सरकार में सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन पहाड़ के लोगों को आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
प्रेस वार्ता में प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह, पूर्व महानगर अध्यक्ष लाल चंद शर्मा, चमोली के पूर्व जिलाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह तथा विजेंद्र रावत भी उपस्थित रहे।
