केदारनाथ धाम यात्रा के दौरान सोशल मीडिया पर पवित्र मंदाकिनी नदी में प्लास्टिक की बोतलें और अन्य कचरा तैरते हुए दिखाई देने वाले वीडियो वायरल होने के बाद जिला प्रशासन ने मामले का गंभीर संज्ञान लिया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नदी को प्रदूषित करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने अधिकारियों को यात्रा मार्ग पर लगातार निगरानी रखने और प्लास्टिक कचरे के अनुचित निस्तारण पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि मंदाकिनी नदी की पवित्रता और पर्यावरणीय संतुलन से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रशासन के अनुसार यात्रा मार्ग पर स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए सुलभ इंटरनेशनल के 400 से अधिक सफाई कर्मी सीतापुर से केदारनाथ धाम तक लगातार सफाई अभियान में जुटे हुए हैं। सोनप्रयाग में प्लास्टिक कचरे को कॉम्पैक्ट करने के लिए विशेष मशीनें लगाई गई हैं, जहां अब तक लगभग 7 टन प्लास्टिक कचरे को प्रोसेस कर रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जा चुका है।
इसके अलावा गीले कचरे को प्रतिदिन 5 से 6 डंपरों के माध्यम से रुद्रप्रयाग स्थित डंपिंग जोन तक पहुंचाया जा रहा है। यात्रा मार्ग पर 600 से अधिक डस्टबिन स्थापित किए गए हैं और पर्यावरण मित्रों की तैनाती कर नियमित सफाई एवं कचरा संग्रहण की व्यवस्था की गई है।
उप जिलाधिकारी अनिल रावत ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार केदारनाथ धाम, यात्रा मार्गों और सार्वजनिक स्थलों पर साफ-सफाई तथा शौचालय व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया गया है। उन्होंने कहा कि गौरीकुंड क्षेत्र में 110 सफाई कर्मियों की विशेष तैनाती की गई है।
सुलभ इंटरनेशनल के प्रतिनिधि धनंजय पाठक ने बताया कि कई बार लोग लापरवाही से प्लास्टिक कचरा नदी या पहाड़ियों में फेंक देते हैं, जिससे सफाई कर्मियों को दुर्गम स्थानों पर जान जोखिम में डालकर सफाई करनी पड़ती है। उन्होंने श्रद्धालुओं, स्थानीय व्यापारियों और आमजन से अपील की कि वे प्लास्टिक और अन्य कचरा निर्धारित डस्टबिन में ही डालें।
जिला प्रशासन ने दोहराया है कि केदारनाथ धाम की पवित्रता, प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यावरण संरक्षण केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक श्रद्धालु, स्थानीय नागरिक और व्यापारी की सामूहिक जिम्मेदारी है। प्रशासन ने सभी से स्वच्छता अभियान में सक्रिय सहयोग की अपील की है, ताकि केदारनाथ यात्रा को “ग्रीन, क्लीन और स्वच्छ” स्वरूप में संचालित रखा जा सके।
