Uttarakhand: सरकार के मानव विकास इंडेक्स के आंकड़े धरातल से अलग: काजी निजामुद्दीन

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव एवं दिल्ली प्रभारी विधायक काजी निजामुद्दीन ने सरकार द्वारा प्रस्तुत मानव विकास इंडेक्स के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार के दावे वास्तविक स्थिति से बिल्कुल अलग हैं। उन्होंने पत्रकार वार्ता में कहा कि एक ओर सरकार मानव विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, जबकि दूसरी ओर प्रदेश में पर्यावरण, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

काजी निजामुद्दीन ने कहा कि देहरादून की हवा लगातार प्रदूषित हो रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) का स्तर 604 के पार पहुंच गया था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज बड़े अधिकारी और मंत्री बिना फिल्टर किया हुआ पानी भी नहीं पी सकते, फिर भी मानव विकास के बड़े दावे किए जा रहे हैं।

उन्होंने गृह मंत्रालय के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2023 के आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड में जन्म के समय लिंगानुपात बेहद चिंताजनक है। राज्य में 1000 पुरुषों पर केवल 868 महिलाएं हैं, जो अन्य राज्यों की तुलना में काफी खराब स्थिति दर्शाता है।

शिक्षा और पलायन पर भी उठाए सवाल
काजी निजामुद्दीन ने कहा कि अगर सरकार द्वारा प्रस्तुत आर्थिक आंकड़े इतने मजबूत हैं तो ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन क्यों नहीं रुक रहा है। उन्होंने शिक्षा के आंकड़े पेश करते हुए कहा कि वर्ष 2016-17 में प्रदेश में प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 12,601 थी, जो 2025 में घटकर 11,116 रह गई है। उच्च प्राथमिक विद्यालय 2,889 से घटकर लगभग 2,500 रह गए हैं, जबकि माध्यमिक विद्यालय 1,100 से घटकर 921 रह गए हैं। कुल मिलाकर 2017 में प्रदेश में 17,753 विद्यालय थे, जो अब घटकर 16,018 रह गए हैं।

बेरोजगारी और आय पर भी सवाल
उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रति व्यक्ति आय 2.73 लाख रुपये बताई है, यानी औसतन 23-24 हजार रुपये प्रतिमाह। लेकिन यह आंकड़े शहरी क्षेत्रों के हैं। यदि वास्तविक स्थिति जाननी हो तो पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, बागेश्वर या ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर देखना चाहिए, जहां लोगों की आय इससे कहीं कम है।

उन्होंने कहा कि पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे के अनुसार प्रदेश में रोजगार की गुणवत्ता भी कम है और शिक्षित युवा अपनी योग्यता से कम स्तर की नौकरियां करने को मजबूर हैं। यह स्थिति प्रदेश को के-शेप्ड इकोनॉमी की ओर ले जा रही है, जहां अमीर और अमीर तथा गरीब और गरीब होता जा रहा है।

निवेश और उद्योगों में गिरावट
काजी निजामुद्दीन ने कहा कि पिछले दस वर्षों में निवेश की कमी के कारण प्रदेश में उद्योगों की संख्या भी घटी है। वर्ष 2017 में प्रदेश में 2,987 फैक्ट्रियां थीं, जो अब घटकर 2,897 रह गई हैं। इनमें रोजगार पाने वालों की संख्या 80,967 से घटकर 77,001 रह गई है। इसी तरह प्रदेश में चीनी मिलों की संख्या भी 10 से घटकर 7 रह गई है।

स्वास्थ्य और कुपोषण की स्थिति चिंताजनक
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड में 59 प्रतिशत बच्चे एनीमिया से पीड़ित हैं, जबकि लगभग 45 प्रतिशत महिलाओं में खून की कमी है। इसके अलावा लगभग 27 प्रतिशत बच्चे कुपोषण का शिकार हैं।

खाली पद और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी
काजी निजामुद्दीन ने कहा कि कैग रिपोर्ट के अनुसार चिकित्सा विभाग में 21,670 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 41 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं। खाद्य एवं रसद विभाग में 54 प्रतिशत, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में 45 प्रतिशत और चिकित्सा शिक्षा विभाग में 40 प्रतिशत पद रिक्त हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 94 प्रतिशत विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है।

बढ़ता कर्ज भी चिंता का विषय
उन्होंने कहा कि जब 2017 में कांग्रेस सरकार ने सत्ता छोड़ी थी तब राज्य पर 44,508 करोड़ रुपये का कर्ज था, जो अब बढ़कर 1,08,527 करोड़ रुपये हो गया है। यानी राज्य पर कर्ज में लगभग 144 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

काजी निजामुद्दीन ने कहा कि सरकार बजट और विकास के बड़े दावे करती है, लेकिन वास्तविक स्थिति इससे अलग है। उन्होंने कहा कि उन्होंने केवल सरकारी आंकड़े जनता के सामने रखे हैं और अब जनता ही तय करेगी कि सच्चाई क्या है।

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