Uttarakhand: उत्तराखंड में 2025 बना हेल्थ हीरो ईयर, चारधाम यात्रा से आपदाओं तक स्वास्थ्य विभाग रहा अग्रिम

उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए यहां ऐतिहासिक साबित हुआ। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों, चारधाम यात्रा में लाखों श्रद्धालुओं की सेहत की चुनौती और मॉनसून आपदाओं के बीच स्वास्थ्य विभाग ने वह कर दिखाया, जिसे अक्सर असंभव माना जाता है। यही वजह है कि वर्ष 2025 को राज्य में ‘हेल्थ हीरो ईयर’ के रूप में देखा जा रहा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वर्ष 2025 में स्वास्थ्य विभाग का प्रदर्शन केवल प्रशासनिक सफलता नहीं, बल्कि मानवीय सेवा की मिसाल है। चारधाम यात्रा जैसे विशाल आयोजन और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ और आपदा राहत दलों ने दिन-रात समर्पण भाव से कार्य किया। उन्होंने कहा कि 2026 में डिजिटल हेल्थ नेटवर्क, टेलीमेडिसिन, ड्रोन आधारित निगरानी और एआई आधारित आपदा पूर्वानुमान प्रणाली को और सशक्त किया जाएगा, ताकि उत्तराखंड स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बन सके।

चारधाम यात्रा में रिकॉर्ड, स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूत तैयारी
वर्ष 2025 की चारधाम यात्रा में केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री में 47 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। यात्रा से पूर्व 13 भाषाओं में जारी हेल्थ एडवाइजरी को पहले की तुलना में 20 प्रतिशत अधिक प्रभावी माना गया। देहरादून, हरिद्वार, टिहरी और पौड़ी को ट्रांजिट मेडिकल हब के रूप में विकसित किया गया, जहां यात्रियों की स्क्रीनिंग और काउंसलिंग की गई।

यात्रा मार्ग पर 49 स्थायी चिकित्सा इकाइयां और 20 मोबाइल रेस्पॉन्स पोस्ट तैनात रहीं। स्क्रीनिंग कियोस्क की संख्या 50 से बढ़ाकर 57 की गई। इन केंद्रों पर 10 लाख 69 हजार 792 यात्रियों की स्वास्थ्य जांच की गई, जिनमें 28 हजार से अधिक सह-रोगी चिन्हित हुए। समय रहते परामर्श और दवाइयों से कई आपात स्थितियों को टाल दिया गया।

केदारनाथ में अत्याधुनिक अस्पताल बना जीवन रक्षक
केदारनाथ धाम में शुरू हुआ 17 बेड का अत्याधुनिक अस्पताल यात्रा 2025 की बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा। ऑक्सीजन थेरेपी, आईसीयू और इमरजेंसी सुविधाओं से लैस इस अस्पताल ने सैकड़ों श्रद्धालुओं की जान बचाई। यात्रा अवधि में 31 विशेषज्ञ डॉक्टर, 200 चिकित्सा अधिकारी और 381 पैरामेडिकल कर्मी तैनात रहे। इसके अलावा अन्य जिलों, भारत सरकार और मेडिकल कॉलेजों से भी विशेषज्ञों की तैनाती की गई।

आपदाओं में भी दिखी तत्परता
मॉनसून के दौरान उत्तरकाशी, चमोली, बागेश्वर और रुद्रप्रयाग में आई आपदाओं में स्वास्थ्य विभाग की टीमें तुरंत सक्रिय रहीं। प्रभावित क्षेत्रों में 50 से अधिक मोबाइल मेडिकल कैंप लगाए गए। गंभीर घायलों को हेली एंबुलेंस से एम्स ऋषिकेश और दून मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया। बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर रोगियों के लिए विशेष ‘वल्नरेबल केयर प्रोटोकॉल’ लागू किया गया।

स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि वर्ष 2025 में स्वास्थ्य विभाग ने असाधारण कार्य किया है और 2026 में जनहित में सेवाओं को और प्रभावी बनाने के लिए विभाग पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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