ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में आज बाबा केदारनाथ और मध्यमहेश्वर की शीतकालीन यात्रा का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस पावन अवसर पर जल कलश यात्रा के साथ मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना संपन्न हुई। पुजारियों और श्रद्धालुओं ने क्षेत्र एवं प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और कल्याण की मंगलकामनाएँ कीं।
धामों के शीतकालीन पूजा स्थल बने आस्था का केंद्र
शीतकालीन गद्दी स्थल पर पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए वर्षभर श्रद्धालुओं की निरंतर आवाजाही बनी रहती है। शीतकालीन यात्रा के आयोजन से न केवल धार्मिक आस्था को नई ऊर्जा मिलती है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होते हैं।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती
शीतकालीन तीर्थाटन को बढ़ावा मिलने से होटल व्यवसाय, परिवहन, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों की बिक्री में वृद्धि की संभावनाएँ बढ़ती हैं। इससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है और लोगों को आजीविका के नए साधन प्राप्त होते हैं।
सरकार कर रही लगातार प्रयास
प्रदेश सरकार का कहना है कि शीतकालीन यात्रा व बारहमासी तीर्थाटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएँ—जैसे मार्ग सुधार, आवास, चिकित्सा, सुरक्षा और साफ-सफाई—उपलब्ध कराने के लिए योजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है।
सरकार का मानना है कि धार्मिक महत्व, क्षेत्रीय विकास और सशक्त रोजगार सृजन की दिशा में शीतकालीन यात्रा आने वाले समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
आस्था, पर्यटन और विकास के इस संगम से उम्मीद है कि ऊखीमठ और आसपास के क्षेत्रों में आने वाले समय में पर्यटन गतिविधियाँ और अधिक सशक्त होंगी।
