अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर प्रदेश कांग्रेस ने एक बार फिर सरकार और जांच एजेंसियों पर सवाल खड़े किए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को उत्तराखंड के अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) वी. मुरूगेशन से मुलाकात कर मामले के विभिन्न बिंदुओं पर ज्ञापन सौंपा और स्पष्टीकरण की मांग की।
कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने ज्ञापन के माध्यम से कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कई गंभीर सवाल आज भी अनुत्तरित हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा के एक पूर्व विधायक की पत्नी द्वारा हाल ही में सोशल मीडिया पर जारी कथित ऑडियो-वीडियो ने पूरे मामले को फिर से चर्चा में ला दिया है, जिसमें एक कथित वीआईपी का नाम सामने आया है। कांग्रेस का स्पष्ट मत है कि इस हत्याकांड में किसी प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका अवश्य रही है, जिसकी इच्छापूर्ति न होने पर अंकिता की निर्मम हत्या की गई।
ज्ञापन में कांग्रेस ने आठ प्रमुख बिंदुओं पर एडीजी कानून-व्यवस्था से स्पष्टीकरण मांगा। इनमें अंकिता का शव मिलने के बाद वनंतरा रिजॉर्ट पर बुलडोजर चलाने के आदेश, एसआईटी की जांच रिपोर्ट में इससे जुड़े तथ्यों, मुख्यमंत्री द्वारा ध्वस्तीकरण को लेकर दिए गए बयान, अंकिता के व्हाट्सएप संदेशों की जांच, सीबीआई जांच का विरोध, रिजॉर्ट के शयनकक्ष को ध्वस्त करने में कथित जनप्रतिनिधियों की भूमिका, पटवारी पर लगाए गए दबाव के आरोप और सबूत नष्ट किए जाने जैसे गंभीर सवाल शामिल हैं।
गणेश गोदियाल ने कहा कि पुलिस और सरकार द्वारा बार-बार यह कहना कि किसी के पास सबूत हों तो सामने लाए, जनता के संदेह को और गहरा करता है। उन्होंने मांग की कि एसआईटी द्वारा की गई जांच को इन सभी प्रश्नों के आलोक में सार्वजनिक किया जाए, ताकि प्रदेश की जनता को सच्चाई पता चल सके और कानून व्यवस्था पर विश्वास बना रहे।
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश महामंत्री राजेंद्र शाह, कर्नल रामरतन नेगी, वीरेंद्र पोखरियाल, सुरेंद्र रांगड़, नीरज त्यागी, कमल रावत, विजय पाल रावत, डॉ. प्रतिमा सिंह, गरिमा दसौनी, राजेश चमोली, डॉ. प्रदीप जोशी सहित बड़ी संख्या में वरिष्ठ व स्थानीय नेता शामिल रहे।
प्रदेश कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि जब तक अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े सभी सवालों के जवाब नहीं मिल जाते, तब तक न्याय की लड़ाई जारी रहेगी।
