उत्तराखंड में अपराध एवं कानून व्यवस्था को लेकर वी मुरुगेसन, अपर पुलिस महानिदेशक ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गढ़वाल और कुमाऊं रेंज के आईजी, सभी जिलों के पुलिस प्रभारियों तथा अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में भूमि संबंधी धोखाधड़ी, सत्यापन अभियान, गुमशुदगी और लंबित विवेचनाओं की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई।
सत्यापन अभियान पर जोर
एडीजी ने बताया कि 15 फरवरी से चल रहे सघन सत्यापन अभियान के तहत अब तक 1,22,411 सत्यापन किए जा चुके हैं। कई जिलों में इस दौरान संदिग्ध अपराधियों को भी पकड़ा गया है। उन्होंने निर्देश दिए कि सत्यापन के दौरान बाहरी राज्यों से आकर छिपे अपराधियों की पहचान पर विशेष ध्यान दिया जाए और विभिन्न पोर्टलों की मदद से आपराधिक इतिहास की जांच की जाए। संदिग्धों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के भी निर्देश दिए गए।
भूमि धोखाधड़ी मामलों में सतर्कता
भूमि संबंधी धोखाधड़ी के मामलों की समीक्षा करते हुए एडीजी ने कहा कि ऐसे मामलों में राजपत्रित अधिकारी की जांच के बाद ही नियमानुसार मुकदमा दर्ज किया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि दीवानी प्रकृति के मामलों में पुलिस अनावश्यक हस्तक्षेप न करे। दोनों रेंज के आईजी को इन मामलों में कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए गए।
गुमशुदगी मामलों में संवेदनशीलता
गुमशुदा मामलों, विशेषकर नाबालिग बच्चों के मामलों में तत्काल एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के निर्देशों तथा जारी एसओपी का पालन अनिवार्य है। गुमशुदा व्यक्तियों की बरामदगी दर बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा गया कि यह पुलिस का सामाजिक दायित्व भी है। जिलों को साप्ताहिक समीक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
लंबित मामलों पर नाराजगी
तीन वर्ष से अधिक समय से लंबित मामलों की समीक्षा के दौरान एडीजी ने नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने पर्यवेक्षण में जल्द से जल्द इनका निस्तारण कराएं। विदेश में रह रहे आरोपियों के खिलाफ एलओसी और रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया तेज करने को भी कहा गया।
बैठक में उपस्थिति:
बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी कृष्ण कुमार वीके, मुख्तार मोहसिन, योगेन्द्र सिंह रावत, धीरेन्द्र सिंह गुंज्याल, रामचन्द्र राजगुरु, विशाखा अशोक भदाणे, अंकुश मिश्रा और योगेश चंद सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
