धर्मनगरी हरिद्वार के खड़खड़ी श्मशान घाट पर किन्नर अखाड़े के संतों और किन्नर समाज ने पारंपरिक ‘मसान होली’ खेली। बैंड-बाजों के साथ जुलूस के रूप में पहुंचे किन्नरों ने सबसे पहले चिता की राख की विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके बाद उसी राख और रंग-गुलाल से एक-दूसरे को रंग लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं।
श्मशान घाट पर जलती और बुझी चिताओं के समीप किन्नरों को होली खेलते देख वहां मौजूद लोग कुछ समय के लिए स्तब्ध रह गए। हालांकि बाद में कई श्रद्धालुओं ने इसे आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम बताया।
नश्वरता और भाईचारे का संदेश
यह पौराणिक परंपरा है, जिसका निर्वहन किन्नर समाज वर्षों से करता आ रहा है। श्मशान की राख जीवन की नश्वरता का संदेश देती है और अहंकार त्याग कर प्रेम व भाईचारे के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देती है। श्मशान मोक्ष द्वार है और हर व्यक्ति को एक दिन यहां आना है। ऐसे में होली के पावन अवसर पर सभी को गिले-शिकवे भुलाकर आपसी प्रेम और सौहार्द से रहना चाहिए।
धार्मिक नगरी हरिद्वार में किन्नर समाज की यह अनोखी मसान होली श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी रही और समाज को जीवन की सच्चाई से रूबरू कराती रही।
