भारत और मिस्र की प्राचीन ज्ञान एवं सांस्कृतिक परंपराओं को आधुनिक शिक्षा, शोध और युवा विकास से जोड़ने की दिशा में देव संस्कृति विश्वविद्यालय और द ब्रिटिश यूनिवर्सिटी इन इजिप्ट के बीच महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। मिस्र यात्रा के दौरान देव संस्कृति विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष डॉ. चिन्मय पंड्या का काहिरा स्थित ब्रिटिश यूनिवर्सिटी इन इजिप्ट में विशेष स्वागत किया गया। इस दौरान दोनों संस्थानों के बीच शैक्षणिक सहयोग को लेकर एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।
डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि भारत और मिस्र विश्व की प्राचीन ज्ञान एवं संस्कृति परंपराओं के दो महत्वपूर्ण केंद्र हैं। दोनों सभ्यताओं ने मानवता को ज्ञान, जीवन-मूल्यों और संस्कृति की समृद्ध विरासत दी है। आज जरूरत इस विरासत को आधुनिक शिक्षा, शोध और युवा शक्ति से जोड़ने की है, ताकि भविष्य की नई दिशा तय की जा सके।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार हासिल करना नहीं, बल्कि ऐसे व्यक्तित्वों का निर्माण करना होना चाहिए जो समाज और विश्व के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझें। दोनों देशों के विश्वविद्यालयों के बीच बढ़ता संवाद विद्यार्थियों और युवाओं को एक-दूसरे की संस्कृति, विचार और ज्ञान परंपराओं को समझने का अवसर देगा। इससे संवेदनशील, जिम्मेदार और रचनात्मक युवा पीढ़ी के निर्माण में मदद मिलेगी।
शोध और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को मिलेगा बढ़ावा
डॉ. पंड्या ने कहा कि देव संस्कृति विश्वविद्यालय शिक्षा को ज्ञान, संस्कृति, चरित्र निर्माण और सेवा से जोड़कर देखने की परंपरा में विश्वास करता है। दोनों विश्वविद्यालयों के बीच हुआ समझौता अकादमिक सहयोग के साथ शोध, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और युवाओं के लिए नए अवसरों का आधार बनेगा।
एमओयू के माध्यम से दोनों संस्थानों के बीच शैक्षिक एवं अकादमिक सहयोग बढ़ाने, ज्ञान के आदान-प्रदान और आने वाली पीढ़ी के लिए सार्थक अवसर विकसित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा।
काहिरा शील्ड से सम्मानित
इस अवसर पर डॉ. चिन्मय पंड्या को सम्मान और मैत्री के प्रतीक के रूप में प्रतिष्ठित काहिरा शील्ड भेंट कर सम्मानित किया गया। ब्रिटिश यूनिवर्सिटी इन इजिप्ट ने उनकी यात्रा के प्रति आभार व्यक्त करते हुए दोनों संस्थानों के बीच मजबूत और दीर्घकालिक साझेदारी की उम्मीद जताई।