सोमनाथ स्वाभिमान पर्व यात्रा के तहत गुजरात पहुंचे उत्तराखंड के तीर्थयात्रियों ने गुरुवार को बाण गंगा, भालका तीर्थ और त्रिवेणी संगम में दर्शन-पूजन कर आध्यात्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। हरेला पर्व के अवसर पर श्रद्धालुओं ने शारदा पीठ परिसर में दो बोरसली के पौधे रोपित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। वहीं हरेला की पूर्व संध्या पर सोमनाथ परिसर में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से भेंट किए गए रुद्राक्ष के पौधे का भी रोपण किया गया।
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने सबसे पहले सोमनाथ स्थित बाण गंगा के दर्शन किए। इसके बाद उन्होंने भालका तीर्थ पहुंचकर पूजा-अर्चना और आरती में भाग लिया। मान्यता है कि इसी स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण को शिकारी के बाण का आघात लगा था, जिसके कारण इस स्थान का नाम भालका तीर्थ पड़ा।
शाम के समय तीर्थयात्रियों ने सोमनाथ संग्रहालय का भ्रमण किया, जहां सोमनाथ मंदिर के प्राचीन अवशेष और ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित किया गया है। श्रद्धालुओं ने मंदिर के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी जानकारियां भी प्राप्त कीं।
इसके बाद सभी श्रद्धालु त्रिवेणी संगम घाट पहुंचे, जहां हिरण, कपिला और सरस्वती नदियों के संगम स्थल पर आयोजित भव्य आरती में शामिल हुए। धार्मिक अनुष्ठानों के बीच हरेला पर्व के अवसर पर शारदा पीठ परिसर में दो बोरसली के पौधे लगाए गए, जिससे पर्यावरण संरक्षण और हरित संस्कृति का संदेश दिया गया।
श्रद्धालुओं ने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व यात्रा केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत, सनातन परंपरा और प्रकृति संरक्षण के संदेश को आत्मसात करने का भी अवसर है। हरेला पर्व पर किए गए पौधरोपण को उत्तराखंड की पर्यावरणीय परंपरा का प्रतीक बताते हुए श्रद्धालुओं ने इसे प्रकृति के प्रति अपनी आस्था और जिम्मेदारी का प्रतीक बताया।
