श्री बदरीनाथ मंदिर में चढ़ावे में कथित हेराफेरी के आरोपों को लेकर अब भैरव सेना भी खुलकर सामने आ गई है। संगठन ने बीकेटीसी ने गठित विभागीय जांच समिति पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की जांच एसआईटी या सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित स्वतंत्र समिति से कराने की मांग की है। संगठन ने आरोपी कर्मचारी को तत्काल निलंबित कर उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की भी मांग की है।

सोमवार को देहरादून प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में भैरव सेना के केंद्रीय अध्यक्ष संदीप खत्री ने कहा कि श्री बदरीनाथ और श्री केदारनाथ धाम करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र हैं। ऐसे में बदरीनाथ धाम में दान-चढ़ावे में कथित हेराफेरी के आरोप अत्यंत गंभीर हैं। उन्होंने दावा किया कि दो जुलाई की घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है।

संदीप खत्री ने आरोप लगाया कि घटना सामने आने के बाद पहले बीकेटीसी के पदाधिकारियों ने इससे इनकार किया, लेकिन बाद में विभागीय जांच समिति का गठन कर दिया। उन्होंने कहा कि अपने ही विभाग के अधिकारियों से जांच कराना उचित नहीं है और इससे मामले को दबाने की आशंका पैदा होती है।

उन्होंने यह भी कहा कि बीकेटीसी की ओर से यह कहा गया कि सीसीटीवी फुटेज स्पष्ट नहीं है, लेकिन अब तक संबंधित फुटेज सार्वजनिक नहीं की गई है। उनका कहना था कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच करनी है तो स्वतंत्र एजेंसी को इसकी जिम्मेदारी सौंपी जानी चाहिए।

भैरव सेना ने बीकेटीसी के उस स्पष्टीकरण पर भी सवाल उठाया, जिसमें संबंधित कर्मचारी को अध्यक्ष का निजी सचिव नहीं बताया गया था। संगठन ने पूछा कि यदि ऐसा है तो उस कर्मचारी की धाम में तैनाती और उसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दिए जाने का आधार क्या था।

संदीप खत्री ने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस प्रकरण में किसी प्रकार का भ्रम या संदेह नहीं रहना चाहिए। इसके लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच समिति गठित करने अथवा एसआईटी से निष्पक्ष जांच कराने की मांग दोहराई।