श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए वीआईपी एवं प्रोटोकॉल दर्शन व्यवस्था में आंशिक संशोधन किया है। नई व्यवस्था का उद्देश्य सामान्य श्रद्धालुओं के दर्शन पर न्यूनतम प्रभाव डालते हुए गणमान्य व्यक्तियों के दर्शन को सुगम, सुरक्षित और समयबद्ध बनाना बताया गया है।
मंदिर समिति द्वारा जारी संशोधित मानक प्रचालन विधि (एसओपी) के अनुसार अब जिला प्रशासन अथवा मंदिर समिति को राज्य सरकार से प्राप्त लिखित प्रोटोकॉल सूचना के आधार पर ही प्रोटोकॉल पर्ची जारी की जाएगी। इसके तहत प्राथमिक सुगम दर्शन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जिसके लिए प्रति व्यक्ति 1100 रुपये की सहयोग राशि निर्धारित की गई है। राशि जमा करने पर मंदिर समिति द्वारा रसीद भी जारी की जाएगी।
नई एसओपी के तहत श्री बदरीनाथ धाम में गेट नंबर-2 से केवल 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांग व्यक्तियों और मंदिर समिति की ओर स्वीकृत व्यक्तियों को ही प्रवेश दिया जाएगा। यदि इसके अतिरिक्त किसी अन्य व्यक्ति को प्रवेश कराया जाता है, तो संबंधित कार्मिक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मंदिर समिति ने वर्तमान प्रोटोकॉल कार्यालय को नीलकंठ विश्रामगृह में स्थानांतरित करने का निर्णय भी लिया है। सभी संबंधित विभागों और भारतीय सेना के समन्वय अधिकारियों को नियमानुसार प्रोटोकॉल सूचना के आधार पर पर्ची प्राप्त कर दर्शन व्यवस्था में सहयोग करने को कहा गया है।
नई व्यवस्था के अनुसार प्रोटोकॉल के तहत दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं को सिंहद्वार के दाहिनी ओर स्थित सीढ़ियों से प्रवेश कराया जाएगा। वहीं राज्य अतिथियों और उनके परिवारों को निर्धारित सहयोग राशि में छूट प्रदान की जाएगी।
मंदिर समिति का कहना है कि चारधाम यात्रा में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए यह व्यवस्था लागू की गई है, ताकि आम श्रद्धालुओं को दर्शन में किसी प्रकार की असुविधा न हो और व्यवस्थाएं सुचारु रूप से संचालित की जा सकें।
