आस्था और श्रद्धा का अनुपम संगम उस समय देखने को मिला, जब माँ जिलासू चंडिका भवानी अपने भक्तों को आशीर्वाद प्रदान कर पुनः अपने पावन गर्भगृह में विराजमान हो गईं। इस अवसर पर क्षेत्र में भक्ति और उल्लास का वातावरण छाया रहा।
माँ के गर्भगृह में पुनः प्रतिष्ठित होने के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। भक्तों ने ढोल-दमाऊ और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज के बीच माँ की पूजा-अर्चना की और भावभीनी विदाई दी। जय माँ चंडिका के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माँ जिलासू चंडिका भवानी अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली शक्ति स्वरूपा मानी जाती हैं। इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन कर सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की।
स्थानीय लोगों के अनुसार यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है, जिसमें विशेष अवसरों पर माँ के दर्शन के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ता है। आयोजन के दौरान मंदिर समिति और प्रशासन द्वारा व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गईं, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
