उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उनके खिलाफ कथित दुष्प्रचार को लेकर मंगलवार को थाना नेहरू कॉलोनी पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराई। जहां उन्होंने भाजपा के आधिकारिक हैंडल पर प्रसारित एक वीडियो को लेकर कड़ी आपत्ति जताई।
अपनी तहरीर में हरीश रावत ने कहा कि वे उत्तराखंड राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हैं और उनकी छवि धूमिल करने के उद्देश्य से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक का दुरुपयोग कर एक वीडियो तैयार किया गया है। यह वीडियो भाजपा की आधिकारिक वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रसारित और प्रचारित किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उक्त वीडियो में हिंदू-मुस्लिम समुदाय को लेकर आपत्तिजनक शब्दों और चित्रों का प्रयोग किया गया है, जिससे दोनों समुदायों के लोगों में असंतोष और असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वीडियो के माध्यम से दोनों समुदायों की धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया गया है और उनकी आस्था पर सीधा प्रहार किया गया है। उन्होंने बताया कि 18 दिसंबर 2025 को उनके संज्ञान में यह मामला आया कि दुर्भावनापूर्ण और गलत नीयत से उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से यह वीडियो भाजपा के आधिकारिक पेज से साझा किया गया, जिसे उत्तराखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और उनके सहयोगियों द्वारा संचालित किया जाता है।
हरीश रावत ने आरोप लगाया कि इस एआई जनरेटेड वीडियो के जरिए न केवल हिंदू-मुस्लिम समुदाय की आस्था को ठेस पहुंचाने का प्रयास किया गया है, बल्कि भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को भी खतरे में डालने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा कि इस वीडियो से उनका कोई संबंध नहीं है और उन्हें राष्ट्रद्रोही दर्शाने का कुप्रयास किया गया है, जिससे उन्हें गहरा मानसिक आघात पहुंचा है।
उन्होंने मांग की कि धार्मिक भावनाओं को भड़काने वाले इस आपत्तिजनक और अवैध वीडियो को बनाने, संचालित करने, प्रचारित और प्रसारित करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए।
इस दौरान थाना नेहरू कॉलोनी में सैकड़ों लोगों की भीड़ जुट गई। इसमें महिलाएं, युवा, छात्र, कांग्रेस कार्यकर्ता सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। मौके पर विधायक ममता राकेश, रवि बहादुर, फुरकान अहमद, अनुपमा रावत, महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला सहित अन्य नेता और समर्थक भी उपस्थित रहे।
