पंच बदरी में प्रथम बदरी के रूप में विख्यात श्री आदिबदरी मंदिर के कपाट पौष माह के आगमन के साथ शीतकाल के लिए विधिवत रूप से बंद कर दिए गए। इस अवसर पर मंदिर परिसर वैदिक मंत्रोच्चार से गूंज उठा। श्रद्धालुओं की उपस्थिति में पुजारियों ने परंपरागत विधि-विधान से विशेष पूजा-अर्चना संपन्न कराई।
कपाट बंद होने से पूर्व भगवान विष्णु की विशेष आरती की गई और धाम की शीतकालीन पूजा व्यवस्था के लिए आवश्यक धार्मिक अनुष्ठान किए गए। कपाट बंद होने के साक्षी बनने के लिए आसपास के गांवों के श्रद्धालु और तीर्थ यात्री बड़ी संख्या में आदिबदरी धाम पहुंचे।
धार्मिक मान्यता के अनुसार पंच बदरी में आदिबदरी को प्रथम बदरी का दर्जा प्राप्त है। मान्यता है कि शीतकाल के दौरान भगवान विष्णु की पूजा-आराधना स्थानीय परंपराओं के अनुसार संपन्न की जाती है। कपाट बंद होने के साथ ही अब मंदिर में शीतकालीन पूजा स्थानीय पुजारियों द्वारा नियमानुसार जारी रहेगी।
मंदिर समिति और प्रशासन की ओर से कपाट बंद होने की प्रक्रिया को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान बदरी विशाल से क्षेत्र की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की।
