उत्तराखंड कांग्रेस के पूर्व सैनिक विभाग के अध्यक्ष कर्नल रामरतन नेगी ने सैन्यधाम के निर्माण में हो रही देरी और परियोजना की लगातार बढ़ती लागत को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि करीब 48 करोड़ रुपये से शुरू बताई गई परियोजना की लागत 91 से 99 करोड़ रुपये तक कैसे पहुंची, इसका पूरा वित्तीय हिसाब जनता के सामने रखा जाना चाहिए। उन्होंने सैन्यधाम के प्रभारी मंत्री गणेश जोशी के इस्तीफे की मांग भी की।

प्रेसवार्ता में कर्नल नेगी ने कहा कि सैन्यधाम केवल भवन नहीं, बल्कि देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों और उनके परिवारों के सम्मान से जुड़ा स्मारक है। ऐसे में परियोजना में पारदर्शिता, समयबद्धता और सार्वजनिक जवाबदेही सबसे महत्वपूर्ण होनी चाहिए।

दो साल में पूरा होना था निर्माण

कर्नल नेगी ने सैन्यधाम की टाइमलाइन बताते हुए कहा कि चार नवंबर 2019 को तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने देहरादून में सैन्यधाम बनाए जाने की घोषणा की थी। 23 जनवरी 2021 को पुरकुल गांव में इसका शिलान्यास हुआ। इसके बाद 15 दिसंबर 2021 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुनियालगांव में सैन्यधाम का दूसरा शिलान्यास किया था।

उस समय परियोजना की लागत करीब 63 करोड़ रुपये बताई गई थी और इसे लगभग दो वर्ष में पूरा करने की बात कही गई थी। शहीद सम्मान यात्रा के माध्यम से 1,734 शहीद परिवारों के आंगन की मिट्टी भी सैन्यधाम के लिए लाई गई थी।

मूल और संशोधित डीपीआर सार्वजनिक करने की मांग

कर्नल नेगी ने कहा कि वर्ष 2022 में आरटीआई से सामने आई जानकारी में परियोजना की लागत करीब 48 करोड़ रुपये बताई गई थी, जबकि वर्ष 2024 की आरटीआई आधारित रिपोर्टों में लागत बढ़कर करीब 99 करोड़ रुपये तक पहुंचने की बात सामने आई। उन्होंने सवाल किया कि परियोजना का दायरा बढ़ने के नाम पर अतिरिक्त खर्च को किस प्रक्रिया के तहत मंजूरी दी गई।

उन्होंने सरकार से मूल डीपीआर, संशोधित डीपीआर, वित्तीय स्वीकृतियां, टेंडर दस्तावेज, वर्क ऑर्डर, अतिरिक्त कार्यों की स्वीकृति, भुगतान विवरण, गुणवत्ता जांच रिपोर्ट और पूर्णता प्रमाणपत्र सार्वजनिक करने की मांग की।

मंत्री के बयान पर भी उठाए सवाल

कर्नल नेगी ने सैन्यधाम के प्रभारी मंत्री गणेश जोशी के उस कथित बयान पर भी सवाल उठाया, जिसमें उन्होंने सैन्यधाम से चुनावी लाभ मिलने की बात कही थी। नेगी ने कहा कि सैन्यधाम किसी राजनीतिक दल की चुनावी उपलब्धि नहीं, बल्कि शहीद सैनिकों के सम्मान का स्मारक है। उन्होंने सवाल किया कि यदि मंत्री स्वयं इसे चुनावी लाभ से जोड़ रहे हैं तो क्या उन्हें विभाग की जिम्मेदारी पर बने रहना चाहिए।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस मामले में स्पष्ट जवाब देने की मांग की। कहा कि यदि सैन्यधाम को चुनावी लाभ से जोड़ने वाले बयान से प्रधानमंत्री सहमत नहीं हैं तो मंत्री का इस्तीफा क्यों नहीं लिया जा रहा है।

शहीदों की मिट्टी पर राजनीति स्वीकार नहीं

कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सुजाता पॉल ने कहा कि सैन्यधाम में लाई गई 1,734 शहीद परिवारों के आंगन की मिट्टी किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं है। सैनिक की निष्ठा किसी पार्टी के प्रति नहीं, बल्कि भारत माता और देश की रक्षा के प्रति होती है। उन्होंने सवाल किया कि शहीदों के सम्मान से जुड़े स्मारक को चुनावी लाभ से जोड़ना क्या शहीदों और उनके परिवारों के सम्मान के साथ न्याय है।

उन्होंने कहा कि शहीद की शहादत और उसकी मिट्टी पूरे देश की है। पूर्व सैनिक विभाग ने सैन्यधाम की पारदर्शिता, शहीदों के सम्मान और सैन्य परिवारों के अधिकारों के मुद्दे पर आवाज उठाते रहने की बात कही।

प्रेसवार्ता में कर्नल मोहन सिंह रावत, कैप्टन बचन सिंह, कैप्टन कुशल राणा, लेफ्टिनेंट साहदेव शर्मा, हवलदार बलबीर सिंह, सूबेदार सिरजीत कृशाली, हवलदार हरेंद्र सिंह बिष्ट, सुजाता पॉल और पंकज सिंह क्षेत्री समेत पूर्व सैनिक विभाग के पदाधिकारी मौजूद रहे।