भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र भट्ट के हल्द्वानी प्रकरण को जायज ठहराने संबंधी बयान पर कांग्रेस ने विरोध जताया है। प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष मदन लाल के नेतृत्व में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने कोतवाली में शिकायत देकर महेन्द्र भट्ट के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट समेत सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की मांग की।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि आठ अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की मौजूदगी में कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कांग्रेस का आरोप है कि कार्यक्रम के बाद भाजपा के सहयोगी संगठनों की ओर से रामलीला मैदान के शुद्धीकरण के नाम पर खरगे और अनुसूचित जाति समाज का अपमान किया गया।
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि सत्ताधारी दल के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद होने के बावजूद महेन्द्र भट्ट ने इस मामले में कार्रवाई कराने के बजाय प्रकरण में शामिल लोगों का बचाव किया और उनके कृत्य को जायज ठहराया। कांग्रेस ने इसे सामाजिक समरसता और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ बताया।
संविधान के अनुच्छेदों का दिया हवाला
मदन लाल ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 14 सभी नागरिकों को कानून के समक्ष समानता का अधिकार देता है, जबकि अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता का अंत करता है। उन्होंने कहा कि जाति के आधार पर किसी व्यक्ति का अपमान संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। कांग्रेस ने कहा कि इस तरह की सोच सामाजिक भाईचारे और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करती है।
पुलिस से एफआईआर दर्ज करने की मांग
कोतवाली में सौंपे गए शिकायती पत्र में मदन लाल ने कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे वरिष्ठ दलित नेता होने के साथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। उनके साथ हुए कथित दुर्व्यवहार से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में रोष है। उन्होंने पुलिस से महेन्द्र भट्ट के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट और भारतीय दंड संहिता की सुसंगत धाराओं में एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई करने की मांग की।
